Indiknow, रोहतक। गौड़ ब्राह्मण शिक्षण महाविद्यालय में "पाठ योजना कैसे करें?" विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सी आर कॉलेज ऑफ एजुकेशन,रोहतक से प्रो. रंजू मालिक एवं प्रो. इंदु बाला, रिसोर्स पर्सन रही। प्राचार्या डॉ महाश्वेता ने पुष्प गुच्छ भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया। डॉ रंजू एवं डॉ इंदु ने पाठ योजना के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पाठ योजना के बिना शिक्षण कार्य महज़ औपचारिकता ही है। यदि विषय वस्तु, कक्षा कक्ष का वातावरण, शिक्षण के उद्देश्यों को पाठ योजना के साथ जोड़कर नहीं पढ़ाया जाए तो यह कतई प्रभावी नहीं होगा। पाठ योजना के चरणों को विस्तार से बताते हुए इस बात पर बल दिया गया कि कक्षाकक्ष का वातावरण अध्यापक की जिम्मेदारी होती है। इसलिए अध्यापक के साथ साथ विद्यार्थियों की भी समान भागीदारी होनी चाहिए ताकि सही ताकि शिक्षण अधिगम प्रक्रिया सही से चले। इस दौरान विद्यार्थियों को विषयवस्तु के उद्देश्यों का निर्माण, शिक्षण सहायक सामग्री, विभिन्न कैशलों का प्रयोग बताया गया । कार्यशाला में विद्यार्थियों से अपने अपने शिक्षण विषयों पर आधारित पाठ योजनाएं तैयार कराई गई । कार्यक्रम का संचालन डॉ विनोद कुमार एवं डॉ सविता शर्मा ने किया एवं धन्यवाद प्रस्ताव डॉ मोना ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ सोन किरण, पूनम अत्री, विनोद शर्मा आदि उपस्थित रहे।
Indiknow, रोहतक। गौड़ ब्राह्मण शिक्षण महाविद्यालय में "पाठ योजना कैसे करें?" विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सी आर कॉलेज ऑफ एजुकेशन,रोहतक से प्रो. रंजू मालिक एवं प्रो. इंदु बाला, रिसोर्स पर्सन रही। प्राचार्या डॉ महाश्वेता ने पुष्प गुच्छ भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया। डॉ रंजू एवं डॉ इंदु ने पाठ योजना के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पाठ योजना के बिना शिक्षण कार्य महज़ औपचारिकता ही है। यदि विषय वस्तु, कक्षा कक्ष का वातावरण, शिक्षण के उद्देश्यों को पाठ योजना के साथ जोड़कर नहीं पढ़ाया जाए तो यह कतई प्रभावी नहीं होगा। पाठ योजना के चरणों को विस्तार से बताते हुए इस बात पर बल दिया गया कि कक्षाकक्ष का वातावरण अध्यापक की जिम्मेदारी होती है। इसलिए अध्यापक के साथ साथ विद्यार्थियों की भी समान भागीदारी होनी चाहिए ताकि सही ताकि शिक्षण अधिगम प्रक्रिया सही से चले। इस दौरान विद्यार्थियों को विषयवस्तु के उद्देश्यों का निर्माण, शिक्षण सहायक सामग्री, विभिन्न कैशलों का प्रयोग बताया गया । कार्यशाला में विद्यार्थियों से अपने अपने शिक्षण विषयों पर आधारित पाठ योजनाएं तैयार कराई गई । कार्यक्रम का संचालन डॉ विनोद कुमार एवं डॉ सविता शर्मा ने किया एवं धन्यवाद प्रस्ताव डॉ मोना ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ सोन किरण, पूनम अत्री, विनोद शर्मा आदि उपस्थित रहे।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें