अधिकारी ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत उपलब्ध पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए करें कार्य : उपायुक्त सचिन गुप्ता
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को दिए निर्देश
Indiknow रोहतक। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत उपलब्ध पांडुलिपियों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण एवं डिजिटलीकरण की दिशा में कार्य करें। ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य देशभर में उपलब्ध प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों, पांडुलिपियों एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान कर आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनका संरक्षण सुनिश्चित करना है, ताकि आने वाली पीढिय़ों के लिए ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
सचिन गुप्ता स्थानीय कैंप कार्यालय में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की वीडियो कोंफ्रेंस के दौरान उच्च शिक्षा विभाग एवं आयुष विभाग के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गत 12 अप्रैल 2025 को ज्ञान भारतम वेब पोर्टल का शुभारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा राष्ट्रीय पांडुलिपी सर्वेक्षण करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य देशभर में उपलब्ध प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण एवं संरक्षण सुनिश्चित करना है।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि भारत में हजारों वर्षों की ज्ञान परंपरा विभिन्न भाषाओं एवं लिपियों में पांडुलिपियों के रूप में विद्यमान है। इन पांडुलिपियों में इतिहास, साहित्य, विज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष, दर्शन एवं कला से संबंधित बहुमूल्य जानकारी संचित है। समय के साथ इनमें से कई पांडुलिपियाँ नष्ट होने की कगार पर हैं, अत: उनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। इन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए निजी संग्राहकों, पुस्तकालयों, मंदिरों, मठों एवं शैक्षणिक संस्थानों से सहयोग प्राप्त किया जाएगा। प्राप्त जानकारी के आधार पर एक विस्तृत राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य में इन पांडुलिपियों के अध्ययन एवं संरक्षण में सहायता मिलेगी।
सचिन गुप्ता ने नागरिकों, संस्थाओं एवं संग्राहकों का आह्वान किया है कि वे अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियों की जानकारी साझा करें, ताकि इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके। यह पहल न केवल हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित करेगी, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए एक अमूल्य धरोहर के रूप में कार्य करेगी। सर्वेक्षण कार्य को चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाएगा, जिसमें पांडुलिपियों की पहचान, भौतिक स्थिति का आकलन, मानकीकृत मेटाडाटा तैयार करना, उच्च गुणवत्ता डिजिटलीकरण तथा अंत में सत्यापन एवं संग्रहण शामिल है।

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