Indiknow, रोहतक। इंदौर में 10 से 12 अप्रैल तक आयोजित रिसर्च सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजी की 34वीं वार्षिक राष्ट्रीय एवं 5वीं अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘आरएसएसीपीकॉन-2026’ में पीजीआईएमएस रोहतक के एनेस्थीसिया विभाग ने उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन करते हुए पांच राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार अर्जित किए। इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक मंच पर देश-विदेश के 2000 से अधिक एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने सहभागिता की और साक्ष्य-आधारित शोध पत्र प्रस्तुत किए। सभी चिकित्सकों को बधाई देते हुए कुलपति डॉ एच के अग्रवाल ने कहा कि निश्चेतन विभाग के चिकित्सकों ने विभागाध्यक्ष डॉ एस के सिंघल के मार्गदर्शन में 5 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करके संस्थान का नाम रोशन किया है, जिसके लिए संस्थान को सभी चिकित्सकों पर गर्व है।
डॉ एच के अग्रवाल ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता एवं अनुसंधान-निष्ठ प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि हमारे एनेस्थीसिया विभाग के संकाय सदस्यों ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर उच्च स्तरीय क्लिनिकल रिसर्च और एविडेंस-बेस्ड प्रैक्टिस का प्रदर्शन किया है। इस प्रकार की वैज्ञानिक सहभागिता से हमारे चिकित्सक नवीनतम तकनीकों एवं प्रोटोकॉल से अद्यतन होते हैं, जिसका प्रत्यक्ष लाभ शल्य चिकित्सा के दौरान मरीजों की सुरक्षा और परिणामों में सुधार के रूप में परिलक्षित होगा। सुरक्षित एनेस्थीसिया एवं प्रभावी पेरिऑपरेटिव केयर हमारे संस्थान के प्राथमिक लक्ष्य हैं।
निदेशक डॉ एस के सिंघल ने कहा कि एनेस्थीसिया, पेरि ऑपरेटिव मेडिसिन का आधारभूत स्तंभ है। ऑपरेशन थियेटर में मरीज की हेमोडायनामिक स्थिरता एवं सुरक्षा एनेस्थेटिस्ट की विशेषज्ञता पर निर्भर करती है। एयरवे मैनेजमेंट, रीजनल एनेस्थीसिया और सिमुलेशन ट्रेनिंग जैसे क्षेत्रों में हमारे विभाग द्वारा किया जा रहा शोध क्रिटिकल मरीजों की मॉर्बिडिटी एवं मॉर्टेलिटी कम करने में निर्णायक सिद्ध होगा। यह उपलब्धि हरियाणा के मरीजों को विश्वस्तरीय, साक्ष्य-आधारित चिकित्सा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कुलसचिव डॉ रूप सिंह ने कहा कि संस्थान ट्रांसलेशनल रिसर्च एवं अकादमिक प्रकाशन को सतत प्रोत्साहित कर रहा है। जब हमारे फैकल्टी सदस्य राष्ट्रीय स्तर की फेलोशिप एवं संपादकीय मंडल में चयनित होते हैं, तो यह पीजीआईएमएस की अकादमिक साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करता है। ओरिजिनल रिसर्च से विकसित होने वाले क्लिनिकल प्रोटोकॉल पेरिऑपरेटिव जटिलताओं को कम करते हैं और मरीज-सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करते हैं। डॉ रूप सिंह ने अवगत कराया कि सिमुलेशन फैसिलिटेटर प्रोग्राम के माध्यम से विभाग अब स्नातकोत्तर छात्रों को उच्च-विश्वस्तता वाले सिमुलेटेड परिदृश्यों में क्राइसिस रिसोर्स मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दे सकेगा। इससे वास्तविक क्लिनिकल परिदृश्य में त्रुटि की संभावना न्यूनतम होगी और मरीज-केंद्रित देखभाल की गुणवत्ता बढ़ेगी।
डॉ प्रीति गहलोत ने बताया कि तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में एडवांस एयरवे तकनीक, अल्ट्रासाउंड-गाइडेड रीजनल एनेस्थीसिया, पेरिऑपरेटिव पेन मैनेजमेंट एवं मरीज सुरक्षा पर केंद्रित वर्कशॉप, लाइव डेमोंसट्रेशन तथा विशेषज्ञ पैनल डिस्कशन आयोजित हुए। प्रोफेसर डॉ प्रीति गहलौत ने नेशनल ओरिजिनल रिसर्च पोस्टर प्रेजेंटेशन में प्रथम पुरस्कार अर्जित कर संस्थान की अनुसंधान क्षमता को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। एयरवे मैनेजमेंट कैटेगरी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ वसुधा गोविल द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र को सर्वश्रेष्ठ पेपर के रूप में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
डॉ निधि को प्रतिष्ठित आरएसए-जेओएसीपी एडिटोरियल फेलोशिप प्रदान की गई। यह फेलोशिप अकादमिक लेखन एवं पीयर-रिव्यू प्रक्रिया में उत्कृष्टता का प्रमाण है और संस्थान की शोध-उन्मुख संस्कृति को सुदृढ़ करेगी। इसके अतिरिक्त सिमुलेशन-बेस्ड मेडिकल एजुकेशन के अंतर्गत सिमुलेशन फैसिलिटेटर प्रोग्राम डॉ प्रीति एवं डॉ कनिका सिवाच ने पूर्ण किया, जिससे विभाग में कौशल-आधारित प्रशिक्षण को नया आयाम मिलेगा।
डॉ प्रीति ने बताया कि ‘माय स्टेट, माय प्राइड’ अकादमिक-सांस्कृतिक प्रतियोगिता में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हुए एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मनीषा मनोहर ने द्वितीय तथा प्रोफेसर डॉ दीपिका सीलवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जो संस्थान की बहुआयामी सहभागिता को दर्शाता है। इस कांफ्रेंस में डॉ जतिन लाल, डॉ सुधा, डॉ अंजू रानी, डॉ आशा,डॉ अनुपमा , डॉ मनीषा रानी ने भी अपने व्याख्यान प्रस्तुत करे।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें