Indiknow, रोहतक : एनसीआर के मानेसर, नोएडा के इलाकों में न्यूनतम मजदूरी बढ़ोतरी की मांग कर रहे सैकड़ो मजदूरों की गिरफ्तारी, पुलिसिया दमन के खिलाफ और पूरे एनसीआर इलाके में एक समान 30000 रुपए मासिक न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर सीटू ने शहर में किया जोरदार रोष प्रदर्शन। विरोध कार्रवाई का नेतृत्व सीटू जिला प्रधान प्रकाशचंद्र ने किया।
प्रदर्शन से पहले उपस्थित सैकड़ो कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सीटू के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, जिला सचिव कामरेड विनोद और किसान सभा के प्रदेश महासचिव सुमित ने कहा कि महंगाई की मार झेल रहे मजदूरों ने अप्रैल के पहले सप्ताह में मानेसर की ऑटोमोबाइल कम्पनियों गारमेंटस सहित दर्जनों कम्पनियों के हजारों मजदूरों ने शान्तिपुर्वक आन्दोलन किया। तब जाकर 8 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने अपनी स्वयं की घौषणा को 1 अप्रैल से लागू करने की घोषणा करनी पड़ी। लेकिन सरकार व प्रशासन द्वारा धारा 163 लगाकर 9 अप्रैल को मजदूरों पर दमन की कार्यवाही की गई। जिसमें दर्जनों मजदूर घायल हुए। मानेसर में 20 महिलाओं सहित 61 मजदूरों को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेजा गया। नोएडा में 350 से ज्यादा मजदूरों को गिरफ्तार करके पुलिस का दुरुपयोग किया गया।
सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार मजदूर-विरोधी चारों लेबर कोड्स लागू कर चुकी है। यह मजदूरों को गुलाम बनाने का रास्ता है। आज फैक्ट्रियों में 70-80 प्रतिशत मजदूर ठेके पर हैं जिनको स्थाई श्रमिकों के मुकाबले काफी कम वेतन मिलता है। आधे से ज्यादा मजदूरों के न रजिस्टर में नाम दर्ज होते, न पीएफ कटता और न ईएसआई कार्ड बनता। 12 घंटे की अवैध रूप से डयूटी करवाकर सिंगल वेतन देकर मजदूरों से भारी धोखाधड़ी की जा रही है। यदि मजदूर अपने अधिकारों के लिए आन्दोलन करते हैं तो उन्हें दमन का शिकार बनाया जाता है। पानीपत रिफाईनरी का मामला हो, मानेसर का या किसी अन्य जगह है। मजदूरों के लिए उद्योगों में सुरक्षा के कोई इन्तजाम नहीं है। हर रोज औद्योगिक दुर्घटनाओं में मजदूर मारे जा रहे हैं। पिछले दिनों सफीदों में अवैध रूप से चल रही फैक्ट्री में 12 महिलाएं जिन्दा जल कर मर गई, फरीदाबाद में आग लगने से मजदूर मारे गए, पानीपत में बिना उपकरणों के सैफटी टैंक में मजदूर उतार दिए गए जो जहरीली गैस से मारे गए। कितने ही ऐसे उदाहरण हैं। हमारी जिन्दगी की कोई कीमत नहीं जबकि हम उत्पादन करने वाले हैं।
हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में आते हैं। जहां लाखों की संख्या में मजदूर हैं जो देश के सभी हिस्सों से आकर काम करते हैं। कायदे से एनसीआर का वेतन एक होना चाहिए। दिल्ली में 18000 रूपये से उपर न्यूनतम वेतन है। जबकि हरियाणा में यह मार्च तक केवल 11274 रूपये था। कानून अनुसार हरियाणा में 2020 में वेतन रिवाईज होना चाहिए था जो नहीं किया गया । पिछले साल 2025 के मई में न्यूनतम वेतन की सिफारिष करने के लिए एक कमेटी बनाई जिस कमेटी में मजदूरों, मालिकों व सरकार के प्रतिनिधि थे। इस कमेटी की 9 बैठकें हुई। उन बैठकों में 30000 रूपये न्यूनतम वेतन की मांग की। लेकिन कमेटी ने 29 दिसम्बर 2025 की बैठक में 23196 रूपये का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया। परन्तु इसे स्वीकार करने की बजाय मुख्यमंत्री ने 2 मार्च के बजट भाषण में 15220 रूपये न्यूनतम वेतन करने की घोषणा की। जिसका एक महीने से ज्यादा समय तक कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया।
विरोध कार्रवाई को संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा के नेता इंद्रजीत सिंह, जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ जगमति सांगवान, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान कर्मवीर सिवाच, रिटायर्ड कर्मचारी संघ के जगपाल सांगवान व मास्टर सुनहेरा, छात्र नेता अमित पिलाना व उज्जवल, आशा वर्कर यूनियन की जिला प्रधान सोनिया व अनीता, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन कि फूलपति, हरियाणा ग्रामीण चौकीदार सभा के भगत सिंह, हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के प्रदेश महासचिव सुमेर सिवाच,भवन निर्माण कामगार यूनियन के जिला प्रधान सतपाल, रोहतक ब्लॉक प्रधान रमेशचंद्र, नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव राकेश चावड़िया, सीटू नेता धर्मवीर हुड्डा, कमलेश लाहली, रामचंद्र सिवाच, प्रेम सिंह घिलोडिया, विकलांग अधिकार मंच के पंकज किसान नेता प्रीत सिंह, बलवान सिंह, अशोक, फूलवती ने अपने विचार रखें।

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