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अंगदान कर खाकी वर्दी का आखिरी फर्ज निभा गया सिपाही : मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा



सिपाही के अंगदान से 5 लोगों को मिली संजीवनी : कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

Indiknow, रोहतक। जिले के सुनारियां जेल में कार्यरत वार्डन की शहादत पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि इस सिपाही की कहानी सिर्फ एक खबर नहीं है बल्कि यह एक आंदोलन है, एक पुकार है। यह हम सबसे एक सवाल पूछती है कि जब हम इस दुनिया से जाएंगे, तो क्या हम सिर्फ राख या मिट्टी में तब्दील होना चाहेंगे, या किसी के लिए जीवन का वरदान बनना चाहेंगे? 

डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि उस पुलिस वाले ने तो अपना फर्ज निभा दिया। उसके परिवार ने अपने आंसुओं की आहुति देकर मानवता का धर्म निभा दिया। अब बारी हमारी है। अंगदान कोई दान नहीं, बल्कि यह तो जीवन का विस्तार है। जब एक इंसान अंगदान करता है, तो वह एक साथ करीब 8 लोगों को जीवन देता है। आज हमारे इस वीर सिपाही के परिवार द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय से 5 लोगों को नया जीवन मिलेगा, इसके लिए उन्हें और हरियाणा सरकार को अपने इस वीर सिपाही पर गर्व है। उन्होंने कहा कि यह सिपाही उनके हल्के से आता है और उनके परिवार ने आज पूरे गोहाना हल्के का नाम रोशन किया है।

उन्होने कहा कि वे सिपाही के दोनों बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की घोषणा करते हैं, जिससे परिवार को इस दुख की घड़ी में कुछ आर्थिक राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि वें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व स्वास्थ्य मंत्री आरती राव का भी धन्यवाद व्यक्त करते हैं, जिन्होंने कुलपति के पद पर डॉ. अग्रवाल जैसे मेहनती चिकित्सक का चयन किया, जिनके प्रयासों से तीन दिन के अंदर 2 अंगदान करवाकर हरियाणा प्रदेश ने अपना एक रिकॉर्ड कायम कर घर-घर तक अंगदान की अलख जगा दी है।

 डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि वें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से वार्ता करके कर्मचारी के परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने का प्रयास करेंगे। डॉ. अरविंद शर्मा ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि आइए, इस वीर सिपाही और उसके महान परिवार से प्रेरणा लें। भ्रांतियों को तोड़ें और सोटो के इस अभियान से जुड़ें। संकल्प लें कि हमारे जाने के बाद हमारी आंखें इस खूबसूरत दुनिया को देखती रहेंगी, हमारा दिल किसी और के सीने में धड़कता रहेगा, और हमारी सांसें किसी और की जिंदगी की वजह बनेंगी।

एक सच्चा सिपाही जीतेजी तो देश की सेवा करता ही है वहीं मरने के बाद भी वो देश के काम आता है। यह मार्मिक बात पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एच के अग्रवाल ने उस वक्त कही जब हरियाणा पुलिस के एक जवान के परिजनों ने अपने लाल का ब्रेन डेड घोषित होने के बाद अंगदान का फैसला लिया। उस सिपाही की सांसे तो चली गईं लेकिन, लेकिन जाते-जाते वह 5 परिवारों के चिराग रोशन कर हमेशा के लिए उनके शरीर में समा कर अमर हो गया। 

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यह सिर्फ एक खबर नहीं, हरियाणा के लिए एक नई सुबह है। एक ऐसी सुबह जहां मौत के बाद भी जिंदगी का कारवां चलता है। मीडिया के सहयोग और सोटो के प्रयासों से प्रदेश में अंगदान को लेकर जो अलख जगी है, उसकी रोशनी अब गांव-गांव तक पहुंच रही है। जहां पहले लोग भ्रांतियों के कारण अंगदान के नाम से डरते थे, अब वही लोग फोन कर, अस्पताल आकर अंगदान की प्रक्रिया पूछ रहे हैं। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जवान के बेटे की आंखों में आंसू और होंठों पर गर्व था। रुंधे गले से उन्होंने बस इतना कहा कि मेरे पिता पुलिस में भर्ती हुए थे तो कसम खाई थी कि देश के लिए जान भी दे देगें। उन्होंने वर्दी का कर्ज चुकाया है। आज वो हमारे बीच नहीं है, लेकिन 5 घरों में उसकी धड़कनें चल रही हैं, उसकी आंखों से कोई दुनिया देख रहा है। इससे बड़ा सुकून एक बेटे के लिए क्या होगा। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एच के अग्रवाल ने कहा कि एक पुलिस वाले के परिवार ने आज अंगदान करके बता दिया कि एक सच्चा सिपाही जीते जी तो देश की सेवा करता ही है, मरने के बाद भी वो देश के काम आता है। यह परिवार पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।

उन्होंने कहा कि सोचिए, एक घर का चिराग बुझा है लेकिन उस एक चिराग से 5 घरों में उजाला हुआ है। कोई मां अपने बेटे को, कोई बहन अपने भाई को, कोई बच्चे अपने पिता को वापस पा रहे हैं। इससे बड़ा कोई दान नहीं, इससे बड़ी कोई देशभक्ति नहीं। मैं उस जवान के परिजनों के चरणों में नमन करता हूं। उन्होंने सबसे मुश्किल घड़ी में सबसे बड़ा फैसला लिया। डॉ अग्रवाल ने आगे कहा कि मीडिया के सहयोग से आज पूरे हरियाणा में अंगदान को लेकर जागरूकता फैल गई है। आप लोगों ने इस खबर को जिस संवेदना से दिखाया है, उसने हजारों लोगों की सोच बदल दी है। जहां पहले लोग अंधविश्वास और भ्रांतियों के कारण डरते थे, अब वही लोग सोटो कार्यालय में फोन कर पूछ रहे हैं कि हम भी अंगदान कैसे कर सकते हैं। यही बदलाव हमें चाहिए।

डॉ. एच.के. अग्रवाल ने प्रदेश की जनता से अपील की है  कि अंगदान कीजिए, क्योंकि आपकी एक हां किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है। मौत अटल है, लेकिन अंगदान करके आप अपनी मौत को भी अमर कर सकते हैं। पीजीआईएमएस में सोटो का 17 नंबर कार्यालय 24 घंटे आपकी सेवा में है। आइए, संकल्प लें कि हम मिट्टी में नहीं मिलेंगे, हम किसी की सांसों में जिंदा रहेंगे।

निदेशक डॉ एस के सिंघल : सिपाही ने सिखाया कि मौत अंत नहीं, शुरुआत है  

पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ एस के सिंघल ने कहा कि हम डॉक्टर रोज जिंदगी और मौत से लड़ते हैं। लेकिन जब कोई परिवार ब्रेन डेड की सबसे असहनीय खबर सुनने के बाद अंगदान की हां भरता है, तो हमारा सिर श्रद्धा से झुक जाता है। इस सिपाही ने हमें सिखाया कि मौत अंत नहीं है। अगर जज्बा हो तो मौत भी एक नई शुरुआत बन सकती है। डॉ सिंघल ने बताया कि सिपाही के लिवर, दोनों किडनी, पैंक्रियाज, दोनों कॉर्निया का दान हुआ है। ग्रीन कॉरिडोर बनाकर किडनी और लिवर को दिल्ली भेजा गया, जबकि एक किडनी और कॉर्निया यहीं पीजीआई में जरूरतमंद मरीजों को लगाए गए। यानी एक साथ 5 जिंदगियां बचाई गईं। यह चमत्कार नहीं, यह हौसले का परिणाम है।

डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि सोटो की टीम और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन असली हीरो वो परिवार हैं जो दुख की घड़ी में भी दूसरों के बारे में सोचते हैं। मैं हरियाणा पुलिस को भी सलाम करता हूं, जिन्होंने अपने जवान को ऐसी विदाई दी कि हर आंख नम हो गई और हर दिल प्रेरित हो उठा।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल : भ्रांतियां टूट रही हैं, उम्मीदें जुड़ रही हैं  

चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल ने कहा, कि पहले हमारे पास अंगदान को लेकर 100 फोन आते थे तो 90 लोग डर के कारण मना कर देते थे। उन्हें लगता था कि अंगदान से शरीर खराब हो जाएगा, अगला जन्म खराब हो जाएगा, या फिर अंतिम संस्कार में दिक्कत होगी। लेकिन सोटो की काउंसलिंग और मीडिया की सकारात्मक खबरों ने ये सारी भ्रांतियां तोड़ दी हैं। डॉ मित्तल ने बताया कि अब हालात ये हैं कि लोग खुद चलकर पूछ रहे हैं कि अंगदान का फॉर्म कहां मिलेगा। पिछले एक हफ्ते में ही 200 से ज्यादा लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। यह बदलाव एक दिन में नहीं आया। इसके पीछे उस सिपाही जैसे सैकड़ों परिवारों का त्याग है, जिन्होंने अपने आंसुओं को रोककर दूसरों की मुस्कान लौटाई है।

 डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि ब्रेन डेड मरीज के परिजनों को समझाना सबसे मुश्किल काम होता है। लेकिन जब वे हां कर देते हैं तो हमें लगता है कि इंसानियत अभी जिंदा है। हम उस परिवार को यही भरोसा दिलाते हैं कि उनके अपने का पूरा सम्मान होगा। जैसे आज सिपाही को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, वैसे ही हर अंगदाता हमारे लिए हीरो है।


अंतिम बात : मिट्टी से मत डरिए, मौत से मत डरिए  

कुलसचिव डॉ. रूपसिंह ने कहा कि यह सिपाही हमें सिखा गया कि वर्दी सिर्फ शरीर पर नहीं, रूह पर पहनी जाती है। वह रूह जो मरने के बाद भी कहती है कि मैं अभी जिंदा हूं, किसी की धड़कन में, किसी की आंखों में, किसी की मुस्कान में। डॉ. रूपसिंह की बात को दोहराते हुए अंत में बस इतना ही कहा कि एक सच्चा सिपाही जीते जी तो देश की सेवा करता ही है, मरने के बाद भी वो देश के काम आता है। आइए, हम भी इस सिपाही की तरह सोचें। आइए, अंगदान करें। क्योंकि कुछ दान ऐसे होते हैं जो हमें मौत के बाद भी जिंदा रखते हैं।

सोटो ने जगाई अलख : डर से संकल्प तक का सफर  

स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो) हरियाणा ने पिछले दो सालों में अंगदान को लेकर एक क्रांति छेड़ दी है। नुक्कड़ नाटक, स्कूल-कॉलेज में सेमिनार, पंचायत स्तर पर बैठकें और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए सोटो की टीम ने गांव-गांव तक संदेश पहुंचाया कि अंगदान में शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता। ब्रेन डेड एक मेडिकल स्थिति है, जिसके बाद व्यक्ति वापस नहीं आ सकता। ऐसे में अंगदान करके 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है। सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि हरियाणा में 2024 में जहां सिर्फ 2 अंगदान हुए थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा 4 पार कर गया है और संस्थान में अभी तक करीब 35  ट्रांसप्लांट हो चुके हैं यह ग्राफ बताता है कि लोग जागरूक हो रहे हैं। खासकर युवा वर्ग और पुलिस-सेना जैसे अनुशासित बलों के परिवार सबसे आगे आ रहे हैं।

सलामी के वो 2 मिनट : जब पूरा अस्पताल खामोश था  

जैसे ही सिपाही का पार्थिव शरीर एंबुलेंस में रखा गया, हरियाणा पुलिस के 22 जवानों ने आगे बढ़कर सैल्यूट किया। उनके पीछे पीजीआई के 21 सुरक्षा गार्ड भी सावधान की मुद्रा में खड़े थे। 2 मिनट तक पूरे अस्पताल परिसर में सन्नाटा था। सिर्फ सिसकियों की आवाज थी। उस सलामी में एक सिपाही के लिए सम्मान था, एक परिवार के त्याग के लिए श्रद्धा थी और अंगदान के लिए प्रेरणा थी। वहां खड़ी एक ग्रामीण महिला ने कहा कि उनके पति को किडनी की समस्या हैं और आज इस सिपाही को सलामी देते देखकर मैंने फैसला कर लिया कि मैं भी अंगदान करूंगी। मैं चाहती हूं कि मेरी मौत के बाद भी कोई ऐसे ही जिए।

आप क्या कर सकते हैं : एक हां, एक जिंदगी  

1. संकल्प लें : नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन की वेबसाइट पर जाकर अंगदान का ऑनलाइन संकल्प ले सकते हैं।  

2. परिवार को बताएं : आपका कार्ड तभी काम आएगा जब आपके परिवार को आपकी इच्छा पता हो। आज ही उनसे बात करें।  

3. भ्रांतियां दूर करें : अंगदान से शरीर विरूपित नहीं होता। पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होता है। सभी धर्म अंगदान को महादान मानते हैं।  

4. सोटो से जुड़े :  पीजीआईएमएस रोहतक में सोटो कार्यालय कमरा नंबर 17 में संपर्क करें। हेल्पलाइन: 7015044343


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