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बाल विवाह पर प्रशासन सख्त, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई : उपायुक्त सचिन गुप्ता


Indiknow, रोहतक। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने आगामी 19 अप्रैल को पड़ने वाली अक्षय तृतीया के अवसर पर जिला में होने वाली शादियों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि किसी भी सूरत में बाल विवाह नहीं होने दिया जाएगा और प्रशासन इस पर कड़ी नजर बनाए हुए है। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने आमजन से भी अपील करते हुए कहा कि बाल विवाह रोकने में प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के को नाबालिग माना जाता है। नाबालिग का विवाह करवाना संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध है, जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है। इस अपराध में दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

सचिन गुप्ता ने बताया कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान जिला में बाल विवाह से संबंधित 11 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंदर कौर द्वारा पुलिस के सहयोग से 8 मामलों में समय रहते विवाह रुकवाए गए, जबकि 3 शिकायतें असत्य पाई गईं। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने विवाह से संबंधित कार्य करने वाली संस्थाओं, धार्मिक नेताओं, हलवाइयों, प्रिंटिंग प्रेस संचालकों और टेंट व्यवसायियों से विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया है कि उनके परिसर में किसी भी नाबालिग का विवाह न हो। उन्होंने बताया कि बाल विवाह न केवल बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, बल्कि यह एक गंभीर कानूनी अपराध भी है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो तुरंत संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी, महिला थाना, हेल्पलाइन नंबर 181 या 112 पर सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

सचिन गुप्ता ने अभिभावकों से भी आह्वान किया है कि वे अपने बच्चों का विवाह बालिग होने के बाद ही करें। प्रशासन द्वारा बाल विवाह निषेध कानून का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि रोहतक जिला को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके।


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