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मरने के बाद दूसरों को नेत्रदान एवं देहदान के लिए प्रेरित कर गए भीमसेन अरोड़ा


 Indiknow, रोहतक।  रोहतक के सुभाष नगर निवासी भीमसेन अरोड़ा ने जीते जी तो हमेशा मानवता की सेवा के लिए कार्य किया  ही, मरने के बाद भी वें दुनिया के लिए नेत्रदान और देहदान करके एक मिसाल कायम कर गए हैं। स्व. भीमसेन अरोड़ा के पुत्र गौतम अरोड़ा और उनके परिवार ने मरणोपरांत उनका शरीर पीजीआईएमएस के एनाटॉमी विभाग में छात्रों की रिसर्च के लिए दान किया। एनाटॉमी विभाग के प्रोफेसर गोपाल  ने  स्व. भीमसेन अरोड़ा का शरीर दान करने के लिए उनके परिजनों का आभार जताया और उन्हें याद स्वरूप एक पौधा भेंट किया। डॉ गोपाल ने कहा कि स्व. भीमसेन अरोड़ा के परिवार ने नेत्र और शरीर दान करवाकर बहुत ही सराहनीय कार्य किया है और यह अन्य लोगों के लिए भी एक प्रेरणास्त्रोत है। उन्होंने कहा कि शरीर दान करना बहुत ही नेक कार्य है। 

  स्व. भीमसेन अरोड़ा के पुत्र गौतम अरोड़ा ने बताया कि उनके पिता का हमेशा प्रयास रहता था कि किसी तरह से समाज की भलाई के लिए कार्य किया जाए। उन्होंने बताया कि उनके पिता की गाड़ियों की दुकान थी और उन्होंने कई सालों पहले ही यह निर्णय ले लिया था कि हमें भी समय के साथ बदलना चाहिए और जीते जी तो आम जनता की सेवा करनी ही चाहिए करने के बाद भी शरीर दान करना चाहिए क्योंकि आखिर में यह शरीर जलकर मिट्टी में ही मिल जाना है इससे अच्छा तो यह किसी रिसर्च में ही काम आ जाए। गौतम अरोड़ा ने बताया कि इसी से प्रेरणा लेते हुए उनके पूरे परिवार ने यह परम ले रखा है कि वह सभी मरणोपरांत अपना नेत्रदान एवं शरीर दान विद्यार्थियों के रिसर्च के लिए देंगे ताकि समाज में कुछ जागरूकता लाई जा सके। 

डॉ आरती  ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि हमें समाज में फैली हुई भ्रांतियों से नहीं डरना चाहिए और ऐसे कार्यों के लिए आगे आना चाहिए जिससे समाज जागरूक हो। उन्होंने कहा कि हमें जीते जी रक्तदान भी करना चाहिए और मरणोपरांत नेत्र एवं शरीर दान करना चाहिए और ब्रेन डेड की स्थिति में हमें अंगदान अवश्य करना चाहिए।देहदान के इंचार्ज डॉ. कमल सिंह ने कहा कि हमें मरने के बाद भी अपनी यादें छोडनी हैं तो अपनी आंखें दान करनी चाहिए क्योंकि जिन लोगों को आपकी आंखें लगेंगी वें ताउम्र आपके आभारी रहेंगे।  इस अवसर पर डॉ गोपाल, डॉ रितु, डॉ आरती, डॉ कमल, डॉ महिमा डॉ शंकर सहित कई लोग उपस्थित थे।

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