- कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल की मानवीय मुहिम लाई रंग
Indiknow, रोहतक : पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल की संवेदनशील पहल और मानवीय अपील एक बार फिर रंग लाई है। उनके समझाने पर 16 वर्षीय ब्रेन डेड किशोर के परिजन अंगदान के लिए तैयार हो गए। शनिवार 26 अप्रैल को पीजीआईएमएस में सुबह 6 बजे से अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी और दोपहर 2 बजे परिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ पार्थिव देह सौंपी जाएगी।
यह एक महीने में पीजीआईएमएस, रोहतक का तीसरा अंगदान है, जिससे संस्थान ने हरियाणा में अंगदान का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। सोटो हरियाणा की मुहिम को कुलपति डॉ. अग्रवाल के नेतृत्व में अभूतपूर्व सफलता मिल रही है। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि गत दिनों सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय किशोर को पीजीआईएमएस के ट्रॉमा सेंटर में लाया गया था। डॉ तरुण ओर उनकी टीम के तमाम प्रयासों के बावजूद 24 अप्रैल को चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि जब युवा के ब्रेन डेड होने की सूचना मिली तो उन्होने स्वयं निदेशक डॉ एस के सिंघल के साथ परिवार से मुलाकात की। उन्हें बताया कि उनका बेटा भले ही इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसके अंगो से करीब 8 लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं। वह मरकर भी अमर हो जाएगा। आपका यह फैसला सैकड़ों परिवारों के लिए मिसाल बनेगा।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि इनका त्याग शब्दों से परे है। अंगदान से बड़ा कोई दान नहीं। एक व्यक्ति का अंगदान 8 जिंदगियां बचा सकता है। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि 26 अप्रैल को सुबह 6 बजे से जिस हस्पताल को जो अंग सोटो अलॉट करेगा वहां के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इसमें किडनी, लिवर, पैंक्रियाज, लंग्स,कॉर्निया और हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंग निकाले जाएंगे। इसके बाद नियमानुसार पोस्टमार्टम किया जाएगा।
डॉ अग्रवाल ने बताया कि दोपहर 2 बजे हम पूरे सामाजिक सम्मान के साथ पार्थिव देह परिवार को सौंपेंगे। पीजीआईएमएस प्रशासन, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और समाजसेवी संगठन पुष्प वर्षा कर इस अमर आत्मा को अंतिम विदाई देंगे।
कैसे हुई ब्रेन डेथ की पुष्टि:
निश्चेतन विभाग के डॉ. तरुण ने पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि 23 अप्रैल को मरीज में ब्रेन डेड के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल को सूचना दी गई। डॉ. मित्तल ने तत्काल 4 वरिष्ठ चिकित्सकों की ब्रेन डेड प्रमाणन समिति गठित की। समिति ने 24 अप्रैल की सुबह पहला एप्निया टेस्ट और अन्य क्लिनिकल टेस्ट किए। पहला टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद नियमानुसार 6 घंटे के अंतराल पर शाम को दूसरा टेस्ट किया गया। दोनों टेस्ट में ब्रेन स्टेम फंक्शन शून्य पाया गया। इसके बाद ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी ने मरीज को कानूनी रूप से ब्रेन डेड घोषित कर सोटो हरियाणा और पुलिस प्रशासन को सूचित किया।
निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी में शामिल डॉ सुरेखा डाबला, डॉ तरुण, डॉ गोपाल व डॉ लव की टीम ने ब्रेन डेड घोषित होने पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल के कार्यालय को सूचना दी। यह मेडिकल साइंस की सबसे बड़ी सेवा है। डॉ. सिंघल ने कहा कि कुलपति डॉ एच के अग्रवाल की मुहिम ओर सभी का प्रयास रंग ला रहा है और प्रदेश में अंगदान का माहौल बन रहा है। यह कुलपति डॉ. अग्रवाल के विजन और उनकी संवेदनशीलता का परिणाम है। हमारा लक्ष्य हरियाणा को अंगदान में देश का नंबर-1 राज्य बनाना है। इसके लिए हम लगातार सोटो हरियाणा के माध्यम से जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
एक महीने में तीसरा अंगदान, हरियाणा में रिकॉर्ड
सोटो हरियाणा के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह ने कहा कि यह कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि पीजीआईएमएस रोहतक एक महीने में तीसरा सफल अंगदान करवा रहा है। हरियाणा के किसी भी सरकारी संस्थान का यह रिकॉर्ड है। डॉ. सुखबीर ने बताया कि डॉ अग्रवाल ने समझाया कि यदि अंगदान कर दें तो किसी की मां, किसी का बेटा, किसी का सुहाग बच जाएगा। कुलपति डॉ अग्रवाल के आने और परिवार को गले लगाकर ढांढस बंधाने से परिवार का हौसला बढ़ा और वे तैयार हो गए।
समाज देगा अंतिम विदाई
पीजीआईएमएस प्रशासन ने निर्णय लिया है कि 26 अप्रैल को दोपहर 2 बजे जब पार्थिव देह परिवार को सौंपी जाएगी, तो ट्रॉमा सेंटर की ओटी से लेकर शव वाहन तक डॉक्टर, स्टाफ और समाजसेवी संगठन के लोग कतारबद्ध होकर पुष्प वर्षा करेंगे। यह सम्मान इसलिए ताकि समाज में संदेश जाए कि अंगदान करने वाला परिवार पूजनीय है।
दोपहर 2 बजे पीजीआईएमएस के मुख्य द्वार पर कई समाजसेवी संगठन, डॉक्टर , नर्सिंग स्टाफ, छात्र और मेडिकल छात्र 16 वर्षीय ब्रेन डेड किशोर की पार्थिव देह पर फूल बरसाकर सम्मान के साथ अंतिम विदाई देंगे। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल स्वयं परिवार को ढांढस बंधाएंगे। पीजीआईएमएस प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस पुण्य कार्य के साक्षी बनें और अंगदान के लिए संकल्प लें। डॉ सुखबीर ने बताया कि कुलपति की मानवीय अपील के बाद शनिवार शाम को शोकाकुल परिवार ने भारी मन से अंगदान की सहमति दे दी।

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