Indiknow, रोहतक। जब हृदय में करुणा, प्रेम और एकत्व की दिव्य चेतना जागृत होती है, तब मानव अपने सीमित स्वार्थों से ऊपर उठकर सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का सशक्त माध्यम बन जाता है। परोपकार, करुणा और परमार्थ जैसे अलौकिक मूल्यों से आलोकित यह पावन अवसर उस दिव्य अनुभूति का प्रतीक बना, जहाँ “मानव को मानव हो प्यारा, एक-दूजे का बने सहारा” का संदेश केवल शब्दों तक सीमित न रहकर हृदयों में जीवंत हुआ।
आज युगप्रवर्तक निरंकारी बाबा गुरबचन सिंह जी महाराज की दिव्य स्मृति में, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के सान्निध्य में दिल्ली के ग्राउंड नं. 8 में "मानव एकता दिवस" आयोजित किया गया। इसके साथ ही देशभर के हजारों सत्संग केंद्रों पर भी यह आयोजन श्रद्धा एवं समर्पण भाव से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और निष्काम सेवा का जीवंत स्वरूप बनकर उभरा।
संत निरंकारी मण्डल के जोनल इंचार्ज आदरणीय बलदेव राज नागपाल जी ने जानकारी देते हुए बताया कि समूचे भारतवर्ष के लगभग 200 स्थानों पर रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन किया गया, जिनमें लगभग 40,000 यूनिट रक्त संकलित किया गया। यह सेवा, परोपकार और मानवता के प्रति समर्पण की अद्भुत मिसाल है। युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह जी की स्मृति में यह दिवस वर्षभर चलने वाली सेवा-सरिता का शुभारंभ है, जिसके अंतर्गत देशभर में लगभग 705 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे, जो करुणा और एकत्व की भावना को निरंतर सुदृढ़ करेंगे।
उल्लेखनीय है कि रक्तदान की यह पावन परंपरा पिछले चार दशकों से निरंतर जारी है। अब तक 9,174 रक्तदान शिविरों के माध्यम से लगभग 15,00,230 यूनिट रक्त संकलित किया जा चुका है, जो मानव सेवा के प्रति निरंकारी मिशन की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है। मानव एकता दिवस के अवसर पर संत निरंकारी सत्संग भवन, सेक्टर-4, रोहतक में भी रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान की अनुभवी चिकित्सक टीम ने डॉक्टर गजेंद्र,डॉक्टर विकास एवं डॉक्टर रवि के नेतृत्व में रक्तदाताओं की समुचित स्वास्थ्य जांच के उपरांत सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से रक्तदान प्रक्रिया सम्पन्न कराई । इस शिविर में कुल 217 पंजीकरण हुए, जिनमें से 140 यूनिट रक्त सफलतापूर्वक संकलित किया गया।रेड क्रॉस सोसाइटी,रोहतक के राज कुमार मोर भी उपस्थित थे।
संपूर्ण आयोजन के दौरान स्वच्छता, सतर्कता एवं सेवा-भाव का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यह पहल केवल जीवनदायिनी सेवा तक सीमित न रहकर मानवता, करुणा और उत्तरदायित्व के उच्चतम आदर्श का प्रतीक बनकर उभरी।सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मधु विहार, दिल्ली से पधारे ज्ञान प्रचारक महात्मा श्री गगन भाटिया जी ने अपने संबोधन में कहा—
“संकीर्णता और अज्ञानता ने सत्य की आवाज को दबाने का प्रयास किया है। आज आवश्यकता संहार की नहीं, श्रृंगार की है; दीवारों की नहीं, पुलों की जरूरत है। ऊँचे नारों से नहीं, बल्कि मानवों के आपसी जुड़ाव से ही सच्ची मानवता का निर्माण होता है।”
युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह जी ने सत्य, सरलता और सद्भावना का मार्ग दिखाते हुए युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने और अपनी ऊर्जा को समाजसेवा में लगाने की प्रेरणा दी। बाबा हरदेव सिंह जी ने “रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं” का संदेश देकर सेवा को जीवन का अभिन्न अंग बनाया, जिसे सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज निरंतर आगे बढ़ा रही हैं।
रोहतक क्षेत्र के संयोजक हेमंत निरंकारी जी ने समस्त साध-संगत एवं रक्तदाताओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बाबा कपिल पुरी जी, गौकरण तीर्थ, रोहतक बाबा राघव जी महाराज, झंग कॉलोनी कुटिया,मनीष ग्रोवर,पूर्व मंत्री हरियाणा सरकार, हिमांशु ग्रोवर और अशोक चौधरी, चेयरमैन, मार्केट कमेटी, रोहतक विशेष रूप से मौजूद रहे।



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