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हरियाणा में पहली बार एयरलिफ्ट हुए अंग : कुलपति डॉ एच के अग्रवाल


एक 16 वर्षीय युवा ने 6 जिंदगियों को दी नई रोशनी, कुलपति की अंगदान की भावुक अपील आ रही काम

Indiknow, रोहतक। हरियाणा की धरती पर रविवार का दिन इतिहास में दर्ज हो गया, जब एक 16 वर्षीय युवा के परिवार ने अपने गहरे दुख को मानवता की सबसे बड़ी मिसाल में बदल दिया। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद इस किशोर के अंग दान किए गए, और पहली बार राज्य में अंगों को एयरलिफ्ट कर दूसरे अस्पताल तक पहुंचाया गया। यह कहना है पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एच के अग्रवाल का। वे रविवार को ट्रॉमा सेंटर में अंगदान करने वाले परिवार को सांत्वना देने पहुंचे थे। डॉ एच के अग्रवाल ने कहा को यह केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि संवेदनाओं, त्याग और उम्मीद का अद्भुत संगम था।

पीजीआइएमएस रोहतक के ट्रामा सेंटर में भर्ती इस युवा के जीवन की डोर जब टूट गई, तब उसके परिजनों ने ऐसा निर्णय लिया जो किसी भी साधारण इंसान के लिए बेहद कठिन होता है। अपने बेटे को खोने के असीम दुख के बीच उन्होंने दूसरों की जिंदगी बचाने का रास्ता चुना। यही वह क्षण था जब दर्द ने सेवा का रूप ले लिया और एक परिवार का साहस कई परिवारों की उम्मीद बन गया। कुलपति डॉ. एच. के अग्रवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को भावुक शब्दों में साझा करते हुए कहा कि यह हरियाणा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि युवा का लिवर इंस्टिट्यूट ऑफ़ लीवर और बीलियरी साइंसेस नई दिल्ली भेजा गया, जहां उससे दो मरीजों को नई जिंदगी मिलेगी। इसके अलावा एक किडनी पीजीआईएमएस रोहतक में ही एक जरूरतमंद मरीज को दी गई, जबकि दूसरी किडनी आर्मी के कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर को आवंटित की गई।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि इस प्रक्रिया का सबसे विशेष और प्रेरणादायक पहलू यह रहा कि चंडीमंदिर स्थित आर्मी कमांड हॉस्पिटल से डॉक्टरों की टीम हेलीकॉप्टर द्वारा बाबा मस्तनाथ हेलिपैड पहुंची। वहां से अंग को एयरलिफ्ट कर तुरंत कमांड हॉस्पिटल वापिस अस्पताल ले जाया गया। हर सेकंड की कीमत थी, हर पल किसी की जिंदगी से जुड़ा हुआ था। डॉ एच के अग्रवाल ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति और समन्वय हो, तो चिकित्सा क्षेत्र में चमत्कार संभव हैं। डॉ अग्रवाल ने बताया कि दोनों कॉर्निया भी पीजीआईएमएस रोहतक को आवंटित किए गए, जिससे दो नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना बनी। इस प्रकार एक 16 वर्षीय युवा ने अपने जाने के बाद भी 6 घरों में रोशनी और खुशियां भर दीं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन परिवारों की कहानी है जो अब फिर से जीवन को मुस्कान के साथ जी सकेंगे।

डॉ. एच. के अग्रवाल ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह परिवार हमारे समाज के लिए प्रेरणा है क्योंकि अभी गत दिनों ही इस युवा के पिता की भी इसी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। अपने सबसे कठिन समय में भी उन्होंने दूसरों के बारे में सोचा। यह त्याग और मानवता की सर्वोच्च मिसाल है। डॉ अग्रवाल ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि अंगदान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ानी बेहद जरूरी है। अंगदान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का जीवन बदल सकता है। हमें इस दिशा में आगे बढ़ना होगा।  

डॉ अग्रवाल ने मीडिया का तहे दिल से धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा जो यह  अंगदान जागरूकता मुहिम को बढ़ाने में अपना भरपूर सहयोग दिया जा रहा है उसी से आज प्रदेश में एक माह के अंदर तीन अंगदान संभव हो पाया है। डॉ एच के अग्रवाल ने कहा कि अंत में यही कहा जा सकता है कि इस युवा ने अपने छोटे से जीवन में वह कर दिखाया, जो कई लोग पूरी जिंदगी में नहीं कर पाते। उसने यह साबित कर दिया कि इंसान की महानता उसके जीने में नहीं, बल्कि उसके जाने के बाद भी दूसरों के लिए जीने में होती है। डॉ अग्रवाल ने हरियाणा पुलिस और जिला प्रशासन का तहे दिल से धन्यवाद व्यक्त किया।

निदेशक डॉ. एस. के सिंघल ने भी इस अवसर पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक उपलब्धि है, बल्कि यह समाज के लिए एक संदेश भी है कि जीवन के बाद भी हम किसी के काम आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रेन डेड की स्थिति में अंगदान से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है, लेकिन इसके लिए परिवार की सहमति और समाज की समझ बेहद जरूरी है।

डॉ एस के सिंघल ने इस दौरान युवा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह युवा भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका यह कार्य उसे अमर बना देगा। डॉ. सिंघल ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि जब जीवन समाप्त हो जाता है, तब हमारे अंग किसी और के लिए नई शुरुआत बन सकते हैं। यह सबसे बड़ा दान है—महादान। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अंगदान के लिए आगे आएं, अपने परिवार को इस बारे में जागरूक करें और जरूरत पड़ने पर ऐसा निर्णय लेने में संकोच न करें।


एलपीएस बोसार्ड के एमडी राजेश जैन ने कहा कि यह घटना हमें कई सवालों के सामने खड़ा करती है कि क्या हम भी ऐसा साहस दिखा सकते हैं? क्या हम अपने जीवन के बाद किसी और को जीवन देने का निर्णय ले सकते हैं? भारत में आज भी हजारों लोग अंग प्रत्यारोपण के इंतजार में हैं। हर दिन कई मरीज सिर्फ इसलिए दम तोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें समय पर अंग नहीं मिल पाता। राजेश जैन ने बताया कि उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए 5 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की, ताकि इस कठिन समय में उन्हें कुछ सहारा मिल सके। राजेश जैन ने कहा की इस 16 वर्षीय युवा की कहानी केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत हो सकती है। यदि हर व्यक्ति इस संदेश को समझे और अपने जीवन में उतारे, तो हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

थलसेना कमांडर (पश्चिमी कमान) ने इसमें शामिल सभी कर्मियों, विशेषकर कर्नल अनुराग की सराहना की और दोहराया कि सेना प्रत्येक सैनिक और उसके परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि हमारे विस्तारित सेना परिवार का स्वास्थ्य और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। जीवन बचाने के लिए हम सभी संसाधनों का उपयोग करते रहेंगे। कर्नल अनुराग ने बताया कि अस्पताल से प्रत्यारोपण केंद्र तक अंग को पहुंचाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टर को तत्काल कार्य पर लगाया गया, जिससे महत्वपूर्ण समय की बचत हुई और अंग की व्यवहार्यता सुनिश्चित हो सकी।

डॉ गौरव ने कहा कि भारतीय सेना अपने सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराती है। राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम के आदर्श के अनुरूप, सेना चिकित्सा आपातकाल के दौरान हर संभव सहायता प्रदान करती आ रही है। डॉ अनुराग ने कहा कि आज आर्मी अस्पताल एयर लिफ्ट करने में सफल हो पाया है उसमें सबसे बड़ा अहम रोल उनके वेस्टर्न कमांड के आर्मी कमांडर और रोहतक के कमिश्नर श्री राजीव रतन का सबसे बड़ा सहयोग रहा है। जिन्होंने आज कल सुबह कुछ ही मिनट में एयर लिफ्ट की अनुमति प्रदान कर एक आर्मी के जवान की अहम जान बचाई।


अंगदान करने वाले सभी परिवार हरियाणा के असली हीरो : स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव  

हरियाणा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव ने पीजीआईएमएस, रोहतक में 16 वर्षीय ब्रेन डेड किशोर का अंगदान कर 6 लोगों को नया जीवन देने वाले परिवार का हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह परिवार पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि जिस हिम्मत और बड़े दिल से इस शोकाकुल परिवार ने अंगदान का फैसला लिया, वह शब्दों से परे है। एक बेटे को खोकर भी उन्होंने 6 घरों के चिराग बुझने से बचा लिए। हरियाणा को ऐसे परिवारों पर गर्व है। यह महादान समाज को नई दिशा देगा।

मंत्री आरती सिंह राव ने उन सभी परिवारों का भी आभार जताया जिन्होंने पहले पीजीआईएमएस और प्रदेश के अन्य संस्थानों में अंगदान कर मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस में एक महीने में यह तीसरा अंगदान है, जिसके लिए कुलपति डॉक्टर एच के अग्रवाल और उनकी टीम बधाई की पात्र है।

 इससे पहले भी जिन परिवारों ने अपना दुख भुलाकर किसी और की जिंदगी बचाने का फैसला लिया, वे सब हरियाणा के असली हीरो हैं। मैं उन सभी माता-पिता, भाई-बहनों को नमन करती हूं जिन्होंने अपने प्रियजन के जाने के बाद भी मानवता को चुना। आपका त्याग कभी भुलाया नहीं जा सकता।

स्वास्थ्य मंत्री की प्रेरणादायक अपील  

आरती सिंह राव ने प्रदेशवासियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि मैं हरियाणा की एक बेटी, एक बहन के रूप में आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूं कि अंगदान को अपना धर्म बनाइए। मृत्यु अटल है, लेकिन हम तय कर सकते हैं कि हमारी मृत्यु भी किसी के जीवन का कारण बने। आज 16 साल के उस बेटे ने हमें बता दिया कि शरीर मिट्टी है, पर कर्म अमर है। आरती राव ने कहा कि पीजीआईएमएस ने हेलीकॉप्टर से किडनी भेजकर दिखा दिया कि हरियाणा अब रुकने वाला नहीं है। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल और पूरी टीम , कमांड अस्पताल चंडी मंदिर की टीम बधाई की पात्र है।

रोहतक पुलिस ने दो ग्रीन कॉरिडोर को बनाया सफलतापूर्वक, तीसरी बार रोहतक पुलिस द्वारा बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर

रोहतक पुलिस ने आज ग्रीन कॉरिडोर को सफलतापूर्वक सफल बनाया है। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर एच के अग्रवाल व अन्य डॉक्टरों द्वारा हरियाणा पुलिस का धन्यवाद व्यक्त किया है। पुलिस अधीक्षक रोहतक श्री गौरव राजपुरोहित के मार्गदर्शन में तथा अत्तिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आयुष यादव के नेतृत्व में रोहतक पुलिस द्वारा सराहनीय कार्य किया गया है। करीब 150 से अधिक पुलिस जवानों ने समय पर अस्पतालों में ऑर्गन पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ग्रीन कोरिडोर बनाने में ट्रैफिक एसएचओ पूर्व, एसएचओ पीजीआई व आईएमटी का विशेष योगदान रहा है। जैसे ही मानव अंग दिल्ली व बाबा मस्तनाथ विश्विद्यालय स्थित हेलिपैड के लिए निकले उसी समय संबंधित रूट पर ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया ताकि बिना किसी व्यावधान के मानव अंग संबंधित हॉस्पिटल में पहुँच सके। इस दौरान आमजन को भी कोई असुविधा न हो इसके लिए भी रोहतक पुलिस द्वारा प्रत्येक चौक व मुख्य बिन्दुओ पर यातायात पुलिस के जवान तैनात कर रखे थे। इस दौरान आमजन का भी सहयोग रहा है जिसने यातायात निमयों की पालना की तथा यातायात पुलिस के निर्देशों की पालना की है। 

ग्रीन कॉरोडिर क्या होता है-

ग्रीन कॉरिडोर एक ऐसा विशेष अस्थाई, स्थाई मार्ग है जिसे पुलिस और प्रशासन मिलकर ट्रैफ़िक मुक्त बनाते हैं। ताकि एम्बुलेंस या अंगदान के लिये कम से कम समय मे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जा सके। जिसका मुख्य उद्देश्य जीवन रक्षक अंगो के परिवहन मे लगने वाले समय को घटाकर मरीजो की जान बचाना है।

हरियाणा में पहली बार अंगों की एयरलिफ्टिंग कर रचा इतिहास

हरियाणा ने रविवार को चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल की मानवीय मुहिम और संवेदनशील अपील रंग लाई, जब 16 वर्षीय ब्रेन डेड किशोर के परिजनों ने उसका अंगदान कर 6 परिवारों के अंधेरे जीवन में उजाला भर दिया। राज्य में पहली बार किसी अंग को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया। सेना की मेडिकल टीम चंडीमंदिर से हेलीकॉप्टर लेकर बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी के हेलीपैड पर उतरी और किडनी लेकर वापस लौटी। यह पीजीआईएमएस, रोहतक का एक महीने में तीसरा अंगदान है, लेकिन एयरलिफ्टिंग के कारण यह सबसे ऐतिहासिक बन गया। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने इसे ‘हरियाणा के लिए गौरव का क्षण’ बताया।

युवा का इलाज करने वाले निश्चेतन विभाग के डॉ तरुण ने भारी मन से बताया कि गत दिनों सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय किशोर को पीजीआईएमएस के ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। सिर में गहरी चोट के कारण 24 अप्रैल को चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। उसके पिता भी उसक साथ ही सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे जिनका स्वर्गवास गत दिनों ही हो गया था।

डॉ तरुण ने बताया कि ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार की सहमति के लिए तुरंत सोटो हरियाणा को सूचना दी गई। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) की गाइडलाइन के तहत अंगों का आवंटन किया गया। डॉ तरुण ने बताया कि जब कुलपति डॉ एच के अग्रवाल ने उस बच्चे के बड़े भाई के कंधे पर हाथ रखा, तो उनकी आंखों में सिर्फ आंसू थे। डॉ अग्रवाल ने कहा कि आपका भाई, बेटा तो चला गया, पर उसके अंग करीब 6 घरों के चिराग बुझने से बचा सकते हैं। आपका बच्चा मरकर भी अमर हो जाएगा।

 डॉ. अग्रवाल की आंखें भी नम हो गईं। मां कुछ देर तक चुप रही, फिर बोली - डॉक्टर साहब, मेरा बेटा दूसरों के काम आ जाए, इससे बड़ा सुकून मेरे लिए कुछ नहीं। हमारा फर्ज है कि हम देश के लिए अगर किसी काम आ जाए तो इससे अच्छी कोई बड़ी बात नहीं हो सकती इसलिए वह अपने बेटे के अंगदान करेंगी।

सोटो हरियाणा के नोडल अधिकारी डॉ सुखबीर सिंह ने बताया कि दूसरी किडनी आर्मी कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर को अलॉट हुई। इसके लिए सेना की एक विशेष डॉक्टर टीम हेलीकॉप्टर से रविवार सुबह 9:30 बजे बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी, अस्थल बोहर के हेलीपैड पर उतरी। पीजीआईएमएस से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर किडनी को हेलीपैड तक पहुंचाया गया और दोपहर 3 बजे हेलीकॉप्टर किडनी लेकर चंडीमंदिर रवाना हो गया। यह हरियाणा में अंग की पहली एयरलिफ्टिंग थी। उसने अपने आप में एक इतिहास बनाया है।

सुबह 10 बजे शुरू हुई प्रक्रिया, दोपहर में दी अंतिम विदाई  

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि रविवार सुबह 10 बजे पीजीआईएमएस के ऑपरेशन थिएटर में वरिष्ठ सर्जनों की टीम और बाहर से आए विभिन्न अस्पतालों के सर्जनों ने अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू की। निश्चेतन, यूरोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी और नेत्र विभाग के करीब 18 से अधिक डॉक्टरों की टीम 5 घंटे तक लगातार काम करती रही। 

प्रक्रिया पूरी होने के बाद पोस्टमार्टम किया गया और दोपहर 40बजे पूरे सम्मान के साथ पार्थिव देह परिवार को सौंपी गई। इस दौरान अस्पताल के मुख्य द्वार से लेकर शव वाहन तक एमबीबीएस विद्यार्थियों ,नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों,डॉक्टर, नर्स, मेडिकल छात्र और समाजसेवी कतारबद्ध होकर खड़े थे। जैसे ही देह ऑपरेशन थिएटर से बाहर आई, पूरा परिसर ‘अमर रहे, अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा। डॉक्टरों और स्टाफ ने पुष्प वर्षा कर उस नन्हीं आत्मा को अंतिम विदाई दी। 

कुलपति की मार्मिक अपील : अंगदान कीजिए, अमर हो जाइए  

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने आमजनता से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि मैं एक डॉक्टर हूं, रोज मौत देखता हूं। लेकिन सबसे ज्यादा दर्द तब होता है जब हम किसी को सिर्फ इसलिए नहीं बचा पाते क्योंकि समय पर अंग नहीं मिला। आज एक 16 साल के बच्चे ने हमें रास्ता दिखाया है। उन्होंने कहा कि लोग डरते हैं कि अंगदान से शरीर खराब हो जाएगा, अगले जन्म में कष्ट होगा। मैं पूछता हूं - जो शरीर चिता में जल जाना है, कब्र में मिट्टी हो जाना है, अगर उससे किसी की मांग का सिंदूर बच जाए, किसी मां की गोद सूनी होने से बच जाए, तो इससे बड़ा धर्म क्या है? गीता कहती है - नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि। आत्मा को कोई नहीं मार सकता। शरीर तो वस्त्र है। पुराना वस्त्र त्यागकर नया धारण करना ही जीवन है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि आज हरियाणा ने दिखा दिया कि हम किसी से कम नहीं। पहली बार हेलीकॉप्टर से अंग गया है। इसका मतलब है कि अब दूरी कोई मायने नहीं रखती। चंडीगढ़, दिल्ली, चेन्नई, कश्मीर से कन्याकुमारी तक  - जहां जरूरत होगी, हम हरियाणा से जीवन भेजेंगे। बस आप संकल्प लीजिए। 18 साल की उम्र के बाद  अंगदान का फॉर्म भर दीजिए। अपने परिवार को बता दीजिए कि मेरे जाने के बाद मेरे अंग दान कर देना। आपका एक फैसला 8 जिंदगियां बचा सकता है।

निदेशक बोले : डॉ. तरुण और टीम असली हीरो  

निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि इस पूरे महादान के पीछे निश्चेतन विभाग के डॉ. तरुण और उनकी टीम की मेहनत है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद 36 घंटे तक इन्होंने बच्चे के अंगों को वेंटिलेटर पर जिंदा रखा। हर घंटे ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन, हार्ट रेट मॉनिटर किया। ये डॉक्टर नहीं, तपस्वी हैं।

डॉ. सिंघल ने आगे कहा कि पीजीआईएमएस अब अंगदान का हब बन रहा है। एक महीने में तीन अंगदान हुए हैं। कुलपति डॉ अग्रवाल का सपना है कि हरियाणा अंगदान में देश का नंबर-1 राज्य बने। डॉक्टर सिंगला ने कहा कि आज एलपीएस बोसार्ड के एमडी राजेश जैन ने भी परिवार को आर्थिक सहायता देकर बहुत नेक कार्य किया।

समाज भी आया आगे : 5 लाख की आर्थिक मदद  

इस नेक कार्य में समाज भी पीछे नहीं रहा। एलपीएस बोसार्ड प्राइवेट लिमिटेड के एमडी राजेश जैन ने पीजीआईएमएस पहुंचकर शोकाकुल परिवार से मिले और युवा को श्रद्धांजलि दी। राजेश जैन ने कहा कि जिस परिवार ने इतना बड़ा दिल दिखाया है, उसके दुख में हम सब साथ हैं। मैंने इस बच्चे की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। उन्होंने घोषणा की कि वे परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए 5 लाख रुपये की सहायता राशि दे रहे हैं। मैं सभी एनजीओ,उद्योगपतियों से अपील करता हूं कि अंगदान करने वाले परिवारों के साथ खड़े हों। राजेश जैन ने कहा कि उनकी कंपनी हर साल अंगदान जागरूकता पर कैंप लगाएगी और लोगों को अंगदान जागरूक करने में अपना संपूर्ण योगदान देगी।

एयरलिफ्ट कैसे हुई : हर मिनट था कीमती  

सोटो हरियाणा की ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर दीप्ति ओर सलाहकार मीडिया राजेश कुमार ने बताया कि किडनी निकालने के बाद उसे सिर्फ 6 से 8 घंटे में ट्रांसप्लांट करना होता है। चंडीमंदिर सड़क मार्ग से 4 घंटे दूर है। एम्बुलेंस से जोखिम था। सेना को जब किडनी एलॉट हुई तब टाइम बहुत कम बचा था। आर्मी कमांड हॉस्पिटल ने 1 घंटे में हेलीकॉप्टर भेजने की मंजूरी ली और इतिहास। रोहतक प्रशासन ओर पुलिस ने बाबा मस्तनाथ हेलीपैड को क्लियर कराया। पीजीआईएमएस से हेलीपैड तक 5 मिनट का ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। रोहतक पुलिस का धन्यवाद कि एक भी सिग्नल रेड नहीं हुआ।

डॉ. सुखबीर ने कहा कि यह कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल की इच्छाशक्ति थी। उन्होंने खुद पुलिस के उच्च अधिकारियों और सेना के अधिकारियों से बात की। एक घंटे में सब तैयार हो गया। हरियाणा ने साबित कर दिया कि यहां जिंदगी बचाने के लिए आसमान भी छोटा पड़ जाए।

अंगदान : आंकड़े और जरूरत  

पीजीआई के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर रोहित ने बताया कि एक आंकड़े के अनुसार भारत में हर साल 5 लाख लोगों की मौत अंग फेल होने से होती है। इनमें से 2 लाख लिवर, 50 हजार हार्ट, 10 हजार फेफड़े के मरीज हैं। लेकिन देश में सिर्फ 0.86 प्रति मिलियन आबादी अंगदान करती है। हरियाणा में यह आंकड़ा 0.5 से भी कम था। लेकिन पीजीआईएमएस की मुहिम के बाद उम्मीद जगी है।  रोहित ने बताया कि एक ब्रेन डेड व्यक्ति से 8 लोगों को जीवन और 50 लोगों को नई जिंदगी दे सकता है।

आसमां भी झुक गया

 जनसंपर्क विभाग के इंचार्ज डॉक्टर वरुण अरोड़ा ने बताया कि बाबा मस्तनाथ हेलीपैड पर जब सेवा का हेलीकॉप्टर किडनी लेकर उड़ा तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नाम थी पायलट ने कॉकपिट से सलूट किया। किडनी को हेलीकॉप्टर तक अंतिम विदाई देने पहुंचे नीचे खड़े कुलपति डॉक्टर एच के अग्रवाल और बेशक डॉक्टर स्क सिंघल ने कहा कि आज हरियाणा ने आसमान में भी उम्मीद लिख दी है। बाबा मस्तनाथ हेलीपैड पर भी पीजीआईएमएस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। रोहतक ने देखा कि कैसे एक बच्चा मरकर भी अमर हो गया।

इन टीमों ने निभाई अहम भूमिका: 

कुलपति डॉ एच के अग्रवाल और निदेशक डॉक्टर एस के सिंघल के दिशा निर्देशन में इन टीम के सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई।

1. ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन (BSD) टीम  -डॉ. सुरेखा डाबला, डॉ. गोपाल कृष्ण, डॉ. तरुण यादव एवं डॉ. लव शर्मा ने नोटो की गाइडलाइन के अनुसार दो बार ब्रेन डेथ टेस्ट किए। हर टेस्ट में 6 घंटे के अंतराल का पालन करते हुए पूरी पारदर्शिता से ब्रेन डेड की पुष्टि की और कानूनी प्रक्रिया पूरी करवाई।

2. फोरेंसिक टीम  

डॉ. लव शर्मा, डॉ. जितेंद्र जाखड़, डॉ. योगेश ने अंग निकालने के बाद नियमानुसार मेडिको-लीगल पोस्टमार्टम किया। पूरी प्रक्रिया में संवेदनशीलता रखते हुए परिवार को समय पर पार्थिव देह सौंपने में मदद की।

3. सोटो हरियाणा टीम  

नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर दीप्ति खर्ब एवं मीडिया सलाहकार राजेश, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर रोहित ने परिवार की काउंसलिंग से लेकर नोटो से समन्वय, अंग आवंटन, सेना से संपर्क और ग्रीन कॉरिडोर बनवाने तक हर कदम पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एयरलिफ्ट की पूरी योजना इन्हीं की देखरेख में बनी।

4. ट्रॉमा टीम  

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल के नेतृत्व में डॉ. पंकज छिकारा, डॉ. राजेश रोहिल्ला,डॉ. अपर्णा परमार, डॉ. परजीत गिल,डॉ अंकुर गोयल, डॉ विवेक ठाकुर, डॉ गौरव पांडे, डॉ आर एस चौहान,डॉ वरुण अरोड़ा, एवं डॉ. रोहित ने पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज के सभी टेस्ट करवाने में अपना अहम योगदान दिया। 

5. जनसंपर्क विभाग के इंचार्ज डॉ. वरुण अरोड़ा, डॉ उमेश यादव ने बताया कि इसराना और पानीपत पुलिस ने भी इस केस को समय पर पूरा करवाने में अहम योगदान दिया जिन्होंने पूरी रात जाकर सभी कानूनी कार्यवाही पूरी की और समय पर अंगदान की प्रक्रिया उनके सहयोग से ही शुरू हो पाई। मीडिया को हेलीपैड पर व्यवस्थाओं से लेकर अंतिम विदाई तक हर जानकारी साझा की और जागरूकता का संदेश पहुंचाया। डॉ वरुण अरोड़ा ने राजेश जैन का तहे दिल से धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने आज बहुत ही नेक कार्य किया है।

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