Indiknow, रोहतक। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय तेवतिया तथा जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण सचिव एवं सीजेएम विशाल सिंह के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार आज पुलिस स्टेशन कलानौर के प्रांगण में पोक्सो अधिनियम 2012 की धारा-23 के संबंध में एक विशेष कानूनी जागरूकता एवं साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं एवं अभिभावकों को बाल संरक्षण संबंधी कानूनों के प्रति जागरूक करना तथा बच्चों की निजता एवं गरिमा की रक्षा के महत्व से अवगत करवाना था।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण रोहतक के डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसल राजबीर कश्यप ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए पोक्सो अधिनियम की धारा-23 के प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह धारा किसी भी बाल पीडि़त की पहचान को सार्वजनिक करने, मीडिया अथवा सोशल मीडिया पर उसकी फोटो, नाम, पता अथवा अन्य पहचान उजागर करने पर प्रतिबंध लगाती है तथा ऐसा करना कानूनन दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया का प्रयोग अत्यधिक बढ़ चुका है, ऐसे में बच्चों से संबंधित संवेदनशील मामलों में सावधानी बरतना प्रत्येक नागरिक की कानूनी एवं नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को साइबर अपराधों, ऑनलाइन शोषण एवं अनुचित सामग्री से बचाने हेतु सतर्क रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बाल अधिकारों की सुरक्षा, पीडि़त बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार तथा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। साथ ही आमजन को यह संदेश दिया गया कि किसी भी बाल शोषण अथवा अपराध की सूचना तुरंत पुलिस अथवा जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण को दें, ताकि पीडि़त बच्चों को समय पर न्याय एवं सहायता उपलब्ध करवाई जा सके। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को समाजहित में अत्यंत आवश्यक बताते हुए जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण रोहतक के प्रयासों की सराहना की।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें