योग से महिला स्वास्थ्य सशक्त होगा, आधुनिक चिकित्सा एवं शोध के साथ बढ़ रही योग की वैज्ञानिक स्वीकार्यता
-PGIMS में स्टेट लेवल रिसर्च कॉन्फ्रेंस आयोजित, कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल व निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने किया शुभारंभ
Indiknow, रोहतक : 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (PGIMS), रोहतक में “Evidence Based Role of Yoga in Women’s Health: Prevention, Management and Quality of Life” विषय पर स्टेट लेवल रिसर्च कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें फैकल्टी सदस्यों, शोधार्थियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों सहित करीब ढाई सौ छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल एवं निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने किया। डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉक्टर सविता सिंघल ने सभी का सेमिनार में आगमन पर अभिनंदन किया ! उन्होंने कहा की हम सब अपने जीवन में योग को शामिल करे ! इससे पहले डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि महिला स्वास्थ्य एक स्वस्थ एवं सशक्त समाज की आधारशिला है। योग की प्राचीन परंपरा को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक चिकित्सा के साथ जोड़कर महिलाओं के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि PGIMS आयुष विभाग के साथ मिलकर योग अनुसंधान और जन-जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य करता रहेगा।
निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि योग थेरेपी की बढ़ती वैज्ञानिक स्वीकार्यता को देखते हुए इसे स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है। योग केवल रोगों की रोकथाम का माध्यम नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य एवं जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने का प्रभावी साधन है। उन्होंने इस आयोजन के लिए आयुष विभाग एवं हरियाणा योग आयोग के प्रयासों की सराहना की।
योग अब विकल्प नहीं, महिला स्वास्थ्य की आवश्यक जीवनशैली चिकित्सा बन रहा है : डॉक्टर पंकज
आयुष विभाग रोहतक की एएमओ डॉ. पंकज ने महिला स्वास्थ्य में योग की वैज्ञानिक भूमिका पर साक्ष्य आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि Prevention, Management और Quality of Life के तीन प्रमुख आयामों में योग महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है।
डॉक्टर पंकज ने कहा कि योग PCOS, एनीमिया और थायरॉइड जैसी समस्याओं की रोकथाम में सहायक है। गर्भावस्था में सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ाने, रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने तथा कैंसर उपचार के दुष्प्रभावों को घटाने में भी योग की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। नियमित योग अभ्यास तनाव, नींद और हार्मोनल संतुलन में सुधार कर महिलाओं की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।
डॉ. पंकज ने कहा कि विभिन्न शोधों के अनुसार नियमित योग से PCOS में इंसुलिन संवेदनशीलता में लगभग 35 प्रतिशत सुधार तथा रजोनिवृत्ति संबंधी लक्षणों में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी देखी गई है। PGIMS की महिला योग ओपीडी में गत वर्ष 1200 से अधिक महिलाओं ने लाभ लिया, जिनमें 68 प्रतिशत महिलाओं में सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को जीवन के प्रत्येक चरण में योग को अपनाना चाहिए। ताड़ासन, भद्रासन, भुजंगासन, कपालभाति, अनुलोम-विलोम एवं श्वसन क्रियाएं विशेष रूप से लाभकारी हैं। उन्होंने बुजुर्गों को योग करते समय दीवार, कुर्सी या किसी परिजन का सहारा लेने तथा योग शुरू करने से पहले योग्य आयुष चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी।
डॉ. पंकज ने सभागार में उपस्थित करीब 250 छात्र-छात्राओं को भ्रामरी प्राणायाम, बद्धकोणासन एवं योग निद्रा का व्यावहारिक अभ्यास करवाया। इस दौरान उनके द्वारा निर्मित लघु फिल्म “सुबह की शुरुआत योग से” का भी प्रदर्शन किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पीजीआई प्रबंधन एव जिला आयुर्वेदिक अधिकारी रोहतक डॉ. ईशा का आभार व्यक्त किया।
सेमिनार के समापन अवसर पर कार्यक्रम की सूत्रधार प्रोफेसर मधु शर्मा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वैज्ञानिक सेमिनार न केवल हमारे ज्ञान एवं बौद्धिक क्षमता का विस्तार करते हैं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में नवीन शोध एवं विचारों के आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर आयुष विभाग की डॉ. सुमन, कार्यक्रम ऑर्गेनाइजर एवं डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. सविता सिंघल, प्रोफेसर डॉ. पारुल पुनिया विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का सफल संचालन पीजीआई प्रवक्ता प्रोफेसर वरुण अरोड़ा ने किया।


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