Indiknow, रोहतक । पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक में स्थित एलटी-1 में बुधवार रोल ऑफ योगा इन वुमन हेल्थ विषय पर सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल और विशिष्ट अतिथि पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल रहे। आयोजन डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. सविता रानी सिंघल द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि योग भारत की मानवता को दी गई सबसे बड़ी सौगात है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने वाली संपूर्ण जीवनशैली है। आज तनाव, चिंता और जीवनशैली जनित रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में योग की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि महिला स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ बीमारी का न होना नहीं है। इसमें शारीरिक फिटनेस, भावनात्मक कल्याण, मानसिक मजबूती, प्रजनन स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण सब शामिल हैं। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि महिलाएं बेटी, मां, पेशेवर और लीडर के रूप में कई भूमिकाएं निभाती हैं। उनका स्वस्थ रहना पूरे राष्ट्र की प्रगति के लिए जरूरी है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वैज्ञानिक शोध भी साबित कर चुके हैं कि नियमित योग से फ्लेक्सिबिलिटी, स्ट्रेंथ, पोस्चर और हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है। यह तनाव, अवसाद, नींद की समस्या, मासिक धर्म संबंधी दिक्कतें, गर्भावस्था और मेनोपॉज के लक्षणों में लाभकारी है। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सा संस्थान के रूप में हमारा दायित्व सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि रोगों से बचाव को बढ़ावा देना भी है। योग सबसे प्रभावी और किफायती निवारक स्वास्थ्य रणनीति है।
पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि योग पूरे शरीर का व्यायाम है। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ की थीम के अनुरूप आज योग को अपनाना जरूरी है। आजकल हार्मोन असंतुलन और फर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो योग से काफी हद तक ठीक हो सकती है। डॉ. सिंघल ने कहा कि योग से मेंटल हेल्थ, स्लीप क्वालिटी और समग्र स्वास्थ्य में बड़ा सुधार होता है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता योग एवं आध्यात्मिक चिंतक डॉ. मारकंडेय आहूजा ने गीता को योग से जोड़ते हुए मैटरनल वेल बीइंग पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि हमें गीता बेस्ड अप्रोच टू मैटरनल वेल बीइंग अपनाने की जरूरत है। प्रेगनेंसी इज मोर दैन ए बायोलॉजिकल जर्नी। गर्भावस्था केवल जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक विकास का पथ है। डाॅ आहूजा ने कहा कि पॉजिटिव मेंटल एटीट्यूड सबसे जरूरी है। गीता हर मां को समत्व का भाव सिखाती है। उन्होंने सलाह दी कि रात को सोने से पहले प्रतिदिन यह जरूर सोचें कि आज दिन में क्या सकारात्मक हुआ और क्या नकारात्मक। उन्होंने बताया कि तनाव में हम दाएं नथुने से और सकारात्मक माहौल में बाएं नथुने से सांस लेते हैं। सांसों पर नियंत्रण से ही मन पर नियंत्रण संभव है।
आयोजनकर्ता डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. सविता रानी सिंघल ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हम जेन-जी जनरेशन बन गए हैं। पहले हम खूब शारीरिक गतिविधियां करते थे, अब बच्चों ने गलियों में खेलना छोड़ दिया है। सोशल मीडिया और इंटरनेट ने हमें घरों में कैद कर दिया है, जिससे शारीरिक गतिविधि शून्य हो गई है। उन्होंने बताया कि आज सम्मेलन में चार व्याख्यान आयोजित किए गए, जिसमें डॉ. मारकंडेय आहूजा के साथ डॉ. पुष्पा दहिया, डॉ. पूनम और डॉ. गीता ने विशेष रूप से योग और महिला स्वास्थ्य पर ज्ञानवर्धन किया। डॉ. सविता सिंघल ने बताया कि योग के महत्व को बताने के लिए ओपीडी में एक पोस्टर प्रर्दशनी भी लगाई गई। अपने व्याख्यान में डॉ सविता सिंघल ने कहा कि हमे प्रतिदिन योग के लिए कम से कम आधा घंटा अवश्य निकलना चाहिए।
डेंटल कालेज की प्राचार्य डॉ. मनू राठी ने बताया कि पोस्टर प्रतियोगिता में सभी 6 पुरस्कार उनके विद्यार्थियों ने जीते। कार्यक्रम के अंत में डॉ मधु शर्मा ने सभी का धन्यवाद व्यक्त किया। डॉ मधु शर्मा ने कहा कि आज के इस कार्यक्रम से यह उपस्थित सभी महिलाओं को बहुत ज्यादा फायदा मिला है और उन्हें योग की अहमियत का पता चला है। मंच का संचालन डॉ शूची ओर डॉ पारुल के किया। पोस्टर सत्र के लिए निर्णायक मंडल में डॉ. किरण बाला नाहर और डॉ. नित्याशा शामिल रहीं। वहीं व्याख्यान सत्रों में चेयरपर्सन के तौर पर डॉ. सपना गर्ग, डॉ. रमेश वर्मा, डॉ. अपर्णा परमार, डॉ. सुधीर अत्री, डॉ. सुशीला टाकसक और डॉ. निशा मारवाह ने जिम्मेदारी निभाई। इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. एम जी वशिष्ठ, डॉ. पुष्पा दहिया, एमडीयू की डीन छात्र कल्याण डॉ सपना गर्ग, डॉ. मधू शर्मा सहित सैकडों चिकित्सक व विद्यार्थिगण उपस्थित रहे।




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