कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा: डॉ. अमरीश भगोल की उपलब्धि यूएचएसआर के लिए अंतरराष्ट्रीय गौरव का क्षण
Indiknow, रोहतक । पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। यूएचएसआर के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अमरीश भगोल को ब्रिटेन में प्रतिष्ठित इंटरनेशनल ट्रैवल फेलोशिप और विजिटिंग प्रोफेसर का सम्मान मिला है। इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि डॉ. भगोल की सफलता पूरे विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण है। यह साबित करता है कि हमारे संस्थान के चिकित्सक और शोधकर्ता वैश्विक मानकों पर खरे उतर रहे हैं।
डॉ. अमरीश भगोल ने अपनी इस उपलब्धि के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें एओएमएसआई और आईएओएमएस द्वारा संयुक्त रूप से दी जाने वाली इंटरनेशनल ट्रैवल फेलोशिप के लिए चुना गया था। यह फेलोशिप देश के ओरल सर्जनों के लिए सबसे प्रतिष्ठित और प्रतिस्पर्धी अवसरों में से एक है। इस वर्ष पूरे भारत से 62 सर्जनों ने आवेदन किया था। दो चरणों की कठोर राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया के बाद डॉ. भगोल का चयन हुआ। उन्होंने फेलोशिप सफलतापूर्वक पूर्ण की।
फेलोशिप के तहत डॉ. भगोल ने यूनाइटेड किंगडम के ग्लासगो स्थित क्वीन एलिजाबेथ यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में प्रशिक्षण लिया। यह अस्पताल ब्रिटेन के सबसे बड़े एनएचएस संस्थानों में से एक है। यहां उन्होंने मैक्सिलोफेशियल ट्रॉमा, सिर और गर्दन के कैंसर, क्लेफ्ट एवं क्रेनियोफेशियल विकृतियों तथा पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा की आधुनिक तकनीकों का गहन अध्ययन किया। उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक और शोध योगदान को देखते हुए क्वीन एलिजाबेथ यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ने उन्हें विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी मान्यता दी है।
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि डॉ. भगोल जैसे संकाय सदस्य हमारे विश्वविद्यालय की असली पूंजी हैं। नारनौल शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर यूएचएसआर का नाम रोशन करना हर युवा के लिए प्रेरणा है। मुझे विश्वास है कि वे ब्रिटेन से अर्जित ज्ञान को अपने विद्यार्थियों और रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ साझा करेंगे। इससे हमारे यहां इलाज और शोध का स्तर और ऊंचा होगा। डॉ. भगोल की शैक्षणिक उपलब्धियां प्रभावशाली हैं।
डॉ भगोल ने बताया कि उनके नाम 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित हैं। उन्होंने कई पाठ्यपुस्तकों में अध्याय लिखे हैं और उनके तीन पेटेंट भी पंजीकृत हैं। मंडिबुलर कॉन्डायलर फ्रैक्चर पर उनका शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा उद्धृत शोधों में शामिल है। उन्होंने मंडिबुलर फ्रैक्चर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त वर्गीकरण प्रणाली भी विकसित की है। उन्हें डॉ. एस.एस. सिद्धू अवार्ड, यूनिवर्सिटी यंग रिसर्चर अवार्ड सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।
इस उपलब्धि पर पीजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल और दंत विज्ञान संस्थान की प्रिंसिपल डॉ. मनु राठी, विभागाध्यक्ष डॉ वीरेंद्र ने भी डॉ. अमरीश भगोल को हार्दिक बधाई दी। डॉ. मित्तल ने कहा कि डॉ. भगोल की फेलोशिप से पीजीआईएमएस में जटिल सर्जरी के मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा। डॉ. मनु राठी ने कहा कि दंत विभाग के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है। डॉ. भगोल का अनुभव नए डॉक्टरों के लिए मार्गदर्शक बनेगा।
डॉ. अमरीश भगोल ने कहा कि वे अपने गुरुओं, सहकर्मियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के आभारी हैं। फेलोशिप से मिला ज्ञान वे युवा सर्जनों तक पहुंचाएंगे ताकि यूएचएसआर में शैक्षणिक और चिकित्सीय उत्कृष्टता को और मजबूती मिल सके। उनकी यह उपलब्धि हरियाणा और भारतीय ओरल सर्जरी समुदाय के लिए गर्व की बात है।

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