भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सम्मेलन में हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष विजय लक्ष्मी चंद गुप्ता ने प्रदेश सरकार के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल को सौंपा मांग पत्र
Indiknow, मथुरा : भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन मथुरा में राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील सिन्धी मुख्य अतिथि रहे। हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष विजय लक्ष्मी चंद गुप्ता ने हरियाना के व्यापरियों और उद्योगपतियों की समस्याओं को रखते हुए एक मांग पत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल को ज्ञापन के रूप में सौंपा। इस अवसर पर उनके साथ भिवानी से भानु प्रकाश, रोहतक से हर्ष गिरधर, हांसी से रामअवतार, होडल से रमेश मंच पर उपस्थित रहे। हरियाणा व्यापार मंडल ने मांग पत्र के माध्यम से प्रदेश सरकार के समक्ष मांग रखी कि प्रदेश में व्यापारी कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन हो , व्यापारी राहत कोष की स्थापना हो , व्यापारियों को पेंशन की योजना लागू करें ,और व्यापारी को टैक्स कलेक्टर का दर्जा प्रदान करें।
व्यापार मण्डल का कहना है कि NCR के चलते उधोगो को डीजल जेनरेटर पर रोक लगाने से उधोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। समय पर कंपनियों में माल के ऑर्डर पूरे न होने पर कंपनी उन्हें ब्लेक लिस्ट में डाल रही हे। ऐसी समस्या को सरकार प्राथमिकता के आधार पर हल कर, उधोगप्तियो ओर व्यापारियों को 1987 कि तर्ज पर गैस रहित जर्नेट्रो पर सब्सिडी देने और डीजल जर्नेट्रो को उचित दाम पर बिकवाने या गैस कंपनी से कम कीमत पर गैस किट लगवाने की व्यवस्था करे। पोलयूशन विभाग की मनमानी के चलते हरियाणा में फरीदाबाद,पानीपत, गुड़गावा,रोहतक में सरकार उधोगिक क्षेत्रो मे CTP प्लांट लगा कर इंडस्ट्री को सीधे उससे जोड़ने की पालिसी बनाए जिससे व्यक्तिगत तौर पर उधोगों को अपने CTP प्लांट न लगाने पड़े, जिन पर लाखो रु खर्च हो जाता है और ऊपर से पॉल्यूशन बोर्ड का अलग से डर बना रहता है । हरियाणा के समस्त उद्योगिक सेक्टरों में छोटे और मध्यम आकार के उद्योगों के लिए छोटे प्लाट की व्यवस्था की जाए जिससे गली मोहल्लों में लगे छोटे-छोटे उद्योगों को उद्योगिक परिसर में स्थापित कर एक बहुत बड़ी समस्या से निजात दिलाया जा सके।
हरियाणा व्यापार मण्डल ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि
1- व्यापारियों की जान माल की सुरक्षा सुनिश्चित करें सरकार ।
2 - शहरों तथा मुख्य बाजारों में सरकार अपने खर्चे पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने की व्यवस्था करें ।
3- हरियाणा के शहरों में मुख्य बाजारों में पुलिस गस्त की व्यवस्था बढ़ाई जाए ।
4- जीएसटी के लागू होने के बाद हरियाणा में मार्केट फीस जो की लगी हुई है इसे पूर्ण रूप से समाप्त किया जाए या अधिकतम एक प्रतिशत मार्केट फीस रखी जाए ।
5- व्यापारियों को टैक्स कलेक्टर का दर्जा दिया जाए ।
6- व्यापारियों की क्षतिपूर्ति योजना हेतु जिला स्तर पर कैंप लगाए जाए ।
7- व्यापारियों की पेंशन योजना लागू की जाए व्यापारियों को पेंशन योजना हेतु सरकार जीएसटी का 2% भाग व्यापारी पेंशन योजना के लिए फिक्स किया जाए ।
8- किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर व्यापारिक क्रेडिट कार्ड जारी किया जाए ।
9- व्यापारियों के आर्म लाइसेंस सरल तरीके से दिए जाएं ।
10- भामाशाह जयंती 29 जून को राष्ट्रीय सत्र पर व्यापारी दिवस घोषित किया जाए ।
11- सभी सरकारी कार्यालय में जहां पर व्यापारियों का लेनदेन या आवागमन रहता है वहां पर व्यापारियों को बैठने के लिए अलग से कक्ष की स्थापना की जाए ।
12- जिला स्तर पर व्यापारी भवन बनाने हेतु सरकारी दाम पर हरियाणा व्यापार मंडल को जमीन उपलब्ध कराई जाए ।
13- शहरों में पर्याप्त स्थान पर पार्किंग स्थल बनाए जाएं जिससे जो जाम की स्थिति बनी हुई है उसे समाप्त किया जा सके।
14 - व्यापारियों के साथ कोई भी अप्रिय घटना घटने पर उचित मुआवजे की व्यवस्था बिना विलंब अर्थात समय बद्ध होनी चाहिए।
15- व्यापारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत पेंशन मेडिकल सुविधा का प्रावधान भी किया जाए।
16- व्यापारी राहत कोष की स्थापना हो।जो भी टैक्स हम व्यापारियों द्वारा सरकारी खजाने में जमा करवाया जाता है इस का मात्र 2% इस कोष में जमा किया जाए ,जिस को आप की ही सहमति से व्यापारियों के कल्याण के लिए खर्च किया जाए।
17- MSME नए भुगतान नियम को बिना विलंब किए समाप्त किया जाए ,लघु कुटीर उद्योगों को बचाया जाए
18-अतिक्रमण हटाने के नाम पर व्यापारियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
19 -सरकारी योजनाओं के कारण विस्थापित होने वाले व्यापारियों को "व्यवासायिक प्रतिपूर्ति" राशि देने, मुआवजा व उचित विस्थापन करने के लिए व्यवस्था बनाई जाए।
20- छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के हितों की रक्षा हेतु ई-कॉमर्स एवं बड़े कॉर्पोरेट रिटेल व्यापार के लिए संतुलित एवं न्यायसंगत नीति बनाई जाए।
21- जिन बड़े व्यावसायिक समूहों एवं कंपनियों का वार्षिक कारोबार ₹400 करोड़ से अधिक है, उन्हें रिटेल व्यापार में विशेष नियामकीय प्रावधानों के अंतर्गत रखा जाए, ताकि छोटे व्यापारियों के व्यवसाय एवं रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
22- स्थानीय व्यापार, पारंपरिक बाजारों एवं छोटे दुकानदारों की सुरक्षा एवं विकास के लिए समान प्रतिस्पर्धा (Level Playing Field) सुनिश्चित की जाए।
23- ऑनलाइन एवं ऑफलाइन व्यापार के लिए समान कर व्यवस्था एवं व्यापारिक नियम लागू किए जाएं, जिससे छोटे व्यापारियों के हित सुरक्षित रह सकें।



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