डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि हर संस्थान में महिलाओं के लिए सुरक्षित, गरिमामय और भयमुक्त वातावरण बनाना प्रबंधन एवं सभी कर्मचारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। पॉश एक्ट केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि कार्यस्थल की संस्कृति को संवेदनशील बनाने का माध्यम है। उन्होंने विभिन्न केस स्टडी के माध्यम से प्रतिभागियों को बताया कि किस प्रकार की गतिविधियां यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आती हैं और ऐसी स्थिति में क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
दूसरा सत्र में एंटी-रैगिंग कमेटी द्वारा मेंटल हेल्थ व स्ट्रेस मैनेजमेंट पर व्याख्यान डॉ. आदर्श एवं डॉ. विपुल द्वारा आयोजित करवाया गया। इसमें डॉ. पुरुषोत्तम ने ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट’ पर व्याख्यान दिया। उन्होंने योग, मेडिटेशन, डिसफंक्शनल थॉट्स की पहचान व प्रबंधन, हेल्दी डाइट और संतुलित लाइफस्टाइल की भूमिका को विस्तार से समझाया। डॉ. पुरुषोत्तम ने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धात्मक और तेज-रफ्तार जीवनशैली में तनाव आम हो गया है। नियमित योग-प्राणायाम, सकारात्मक सोच और समय प्रबंधन से तनाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. भूपेंद्र सिंह ने ‘मेंटल हेल्थ’ पर बोलते हुए तनाव के शुरुआती लक्षणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगातार थकान, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी, एकाग्रता में कमी और भूख न लगना मानसिक तनाव के संकेत हो सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने से डिप्रेशन व अन्य शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए समय पर काउंसलिंग और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।
डेंटल कॉलेज की प्राचार्य प्रो. डॉ. मनु राठी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थी, फैकल्टी और स्टाफ सभी किसी न किसी स्तर पर तनाव का सामना कर रहे हैं। पॉश एक्ट की जानकारी हर कर्मचारी के लिए अनिवार्य है ताकि कार्यस्थल सुरक्षित रहे। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा होना भी जरूरी है। उन्होंने दोनों समितियों के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में डॉ. भावना ने सभी वक्ताओं, आयोजकों, फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट्स और छात्रों का धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच का संचालन डॉ. विपुल यादव ने किया।
डॉ महेश गोयल ने बताया कि व्याख्यानों में इंटरनल कंप्लेंट कमेटी, एंटी-रैगिंग कमेटी के सदस्य, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी, पीजी छात्र एवं पैरामेडिकल स्टाफ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


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