Indiknow, रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर दंत विज्ञान संस्थान (पीजीआईडीएस) के प्रोस्टोडॉनटिक्स विभाग में डेंचर इन ए डे-कॉम्प्रिहेंसिव हैंड्स ऑन कंप्लीट डेंचर फेब्रिकेशन पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। प्राचार्य डॉ. मनु राठी के नेतृत्व और आयोजन सचिव प्रोफेसर डॉ. पंकज गहलोत की देखरेख में चल रही इस कार्यशाला में हरियाणा के सभी जिलों के सिविल अस्पतालों से करीब 150 दंत शल्य चिकित्सक भाग ले रहे हैं।
डॉ. मनु राठी ने बताया कि पूरे हरियाणा में पीजीआईडीएस रोहतक एकमात्र संस्थान है जहां संपूर्ण डेंचर बिना किसी प्रतीक्षा सूची के बनाई जा रही है। हमारे यहां मरीज को महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता। दंत-विहीन मरीज आते ही उनका इलाज शुरू हो जाता है। हमारी टीम एक दिन में ही डेंचर फेब्रिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर देती है। डॉ. राठी ने बताया कि पीजीआईडीएस की यह विशेषज्ञता अब पूरे प्रदेश में पहुंचे, यही इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है। एक चिकित्सक होने के नाते हमारा फर्ज है कि जो तकनीक हमारे पास है, उसे हर जरूरतमंद मरीज तक पहुंचाएं। जब सिविल अस्पतालों के चिकित्सक भी यह तकनीक सीख जाएंगे तो गांव के बुजुर्ग को रोहतक आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
डॉ. मनु राठी ने स्पष्ट किया कि अब हम उन्नत तकनीकों सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके समकालीन डेन्चर निर्माण, जिसमें डिजिटल स्कैनिंग, डिजिटल डिज़ाइनिंग, एग्जोकेड सॉफ्टवेयर, मैशमिक्सर सॉफ्टवेयर और फुल्ली एडस्टेबल आर्टिकुलेटर पर काम कर रहे हैं। आधुनिक एग्जोकेड और मेशमिक्सर जैसे सॉफ्टवेयर से डेंचर की फिटिंग पहले से कहीं बेहतर हो गई है। एक्सोकैड सॉफ्टवेयर की मदद से डिजिटल डिजाइनिंग इतनी सटीक होती है कि मरीज के जबड़े की हर बारीकी को स्कैन कर उसी के अनुरूप डेंचर तैयार की जाती है।
फुली एडजस्टेबल आर्टिकुलेटर से मरीज के काटने और चबाने के पैटर्न को हूबहू रिकार्ड कर लिया जाता है, जिससे डेंचर लगने के बाद बार-बार एडजस्टमेंट की जरूरत ही नहीं पड़ती। डॉ. राठी ने कहा कि पहले ट्रेडिशनल तरीके से डेंचर बनाने में कई दिन लगते थे और बार-बार एडजस्टमेंट कराना पड़ता था। अब डिजिटल प्लानिंग से हम पहले ही दिन मरीज के मुंह में सही फिट का डेंचर दे देते हैं। इससे मरीज का समय, पैसा और तकलीफ तीनों बचते हैं। एग्जोकड और मैशमिक्सर जैसे सॉफ्टवेयर ने प्रोस्थोडोंटिक्स को पूरी तरह बदल दिया है।
डॉ पंकज गहलोत ने बताया कि पहले दिन सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक व्याख्यान और नैदानिक व्यावहारिक सत्र चले। दूसरे दिन व्याख्यान के बाद परिचर्चा और प्रश्न-उत्तर सत्र होगा। डॉ. गहलोत ने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि हर चिकित्सक को पूरा आत्मविश्वास देकर ही यहां से भेजेंगे। उन्होंने बताया कि कल कुलपति डॉ एच के अग्रवाल इस वर्कशॉप का औपचारिक रूप से शुभारम्भ करेंगे।डॉ. गहलोत ने कहा कि डेंचर सिर्फ दांत नहीं देती, वह मरीज को आत्मविश्वास देती है। खाना चबाने से लेकर साफ बोलने तक, बुजुर्गों की जीवन की गुणवत्ता बदल जाती है। इसलिए हम चाहते हैं कि यह सेवा हर सिविल अस्पताल तक पहुंचे। आयोजन समिति में डॉ. कोमल के. सरोया, डॉ. सार्थक सिंह तोमर, डॉ. कुसुम, डॉ. स्टालिन एम और डॉ. वैभव शामिल हैं। कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे।
हर कार्य-स्थल पर अलग तकनीक :
आयोजन सचिव डॉ. पंकज गहलोत ने बताया कि कार्यशाला को बेहद व्यावहारिक तरीके से तैयार किया गया है। यहां हर कार्य-स्थल पर अलग-अलग तकनीक सिखाई जा रही है। कोई स्टेशन बॉर्डर मोल्डिंग पर फोकस कर रहा है तो कोई गॉथिक आर्च ट्रेसिंग पर। किसी स्टेशन पर डिजिटल स्कैनिंग की प्रैक्टिस हो रही है तो किसी पर एग्जोकड सॉफ्टवेयर पर डिजाइनिंग सिखाई जा रही है। डेलीगेट सीधे मरीजों पर काम कर रहे हैं। पहले दिन में पेशेंट इवैल्यूएशन, डिजिटल प्लानिंग, प्रिलिमिनरी इम्प्रेशन, प्राइमरी कास्ट इवैल्यूएशन, स्पेशल ट्रे, फाइनल इम्प्रेशन और जॉ रिलेशन रिकॉर्ड जैसी 6 प्रमुख प्रक्रियाओं की ट्रेनिंग दी गई। फुली एडजस्टेबल आर्टिकुलेटर पर मरीज के बाइट को कैसे माउंट करते हैं, यह भी लाइव डेमो के साथ सिखाया गया।
कुलपति डॉ. अग्रवाल का मार्गदर्शन :
डॉ मनु राठी ने कहा कि यह कार्यशाला कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल के मार्गदर्शन में हो रही है। डॉ. मनु राठी ने कहा कि डॉ अग्रवाल का दृष्टिकोण है कि पीजीआईडीएस की हर विशेषज्ञता प्रदेश के लिए प्रशिक्षण केंद्र बने। हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं। आज झज्जर, सोनीपत, पानीपत, हिसार, करनाल, गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत करीब हर जिले से सरकारी चिकित्सक आए हैं। ये अपने-अपने अस्पतालों में बिना प्रतीक्षा के डेंचर बना सकेंगे।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें