-जीवन माता-पिता से मिलता है और जीवन जीना गुरु सिखातें हैं : साध्वी मानेश्वरी देवी
-संकट मोचन मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर हुआ पूजन, आशीर्वचन, भजन संध्या, कीर्तन और भंडारा
-भजन-कीर्तन में झूम उठे भक्तजन
Indiknow, रोहतक । माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में बुद्धवार को आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते का प्रतीक गुरु पूर्णिमा (व्यास पूजा) का पर्व श्रद्धा, उत्साह और हर्षोल्लास से मनाया गया। इसी दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था तो इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है । कार्यक्रम में प्रात: ब्रह्मलीन गुरुमां साध्वी गायत्री, गद्दीनशीन साध्वी मानेश्वरी देवी और देवी-देवताओं की पूजा अर्चना कर उज्जवल भविष्य व सुख-समृद्धि की कामनाएं की। तत्पश्चात साध्वी द्वारा भजन व सत्संग का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में हाँसी से आई हरिदासी भजन गायिका पूनम ने अपनी रसमयी वाणी से भजन गाकर भक्तों को नाचने झूमने पर विवश कर दिया । मेरे सतगुरु मुझे अपने चरणों में रखना.., गोविंद बोलो जय-जय राधा बोलो.., हमको एक भरोसा राधा रानी का... पर भक्त मन्त्र मुग्ध हो उठे। पंडित अशोक शर्मा द्वारा आरती की गई और भक्तों ने भंडारे का प्रसाद लिया। यह जानकारी सचिव गुलशन भाटिया ने दी।
इस अवसर पर भक्तों ने अपनी श्रद्धा, आस्था भाव से गुरुजनों के चरण स्पर्श, वंदन, तिलक कर, फल, मिठाई, वस्त्र तथा दान दक्षिणा देकर सुख, समृद्धि, खुशियाली, हरियाली के लिए माथा टेक कर पूजा-अर्चना और आरती की तथा गुरुजनों से आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरुजी ने भक्तों को मस्तक पर तिलक लगाकर उन्हें आर्शीवाद दिया।
कलियुग में गुरु के बिना भवसागर पार करना असम्भव :
साध्वी मानेश्वरी देवी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कहा कि धर्म शास्त्रों में गुरु पूजा का विशेष महत्व है । उन्होंने कहा कि ध्यान, तीर्थ सब कर लेने से भी वह लाभ नहीं होता, जो गुरु पूजा से है । उन्होंने कहा कि कलियुग में गुरु के बिना कोई भवसागर को पार नहीं कर सकता । उन्होंने कहा कि गुरु ही हमें अज्ञान के अंधकार से बाहर निकाल कर ज्ञान की रोशनी में चलने का मार्ग दिखाते है बताया कि गुरु के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।जीवन हमारे माता-पिता से मिलता है और जीवन जीना गुरू सिखातें हैं :
उन्होंने कहा कि गुरु नाम में ही सम्मान और शिक्षा का भाव होता हैं। इंसान अपने जीवन मे सब कुछ कर सकता है परंतु वो जो कर रहा हैं, वो काम सही है या नहीं ये जानने की सिख उसे गुरु से मिलती है। एक दूसरे का सम्मान करना और अपने देश से प्रेम करना गुरु से ही सीखने को मिलता है। हमे जीवन हमारे माता-पिता से मिलता है, और जीवन जीना गुरु सिखातें हैं।



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