Indiknow, रोहतक। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले देश और हरियाणा दोनों जगह तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में हर साल प्रति 1 लाख महिलाओं पर लगभग 28 से 30 नए मामले सामने आते हैं। वहीं हरियाणा में यह महिलाओं में होने वाले कैंसर का सबसे बड़ा कारण है - हर 4 में से 1 महिला कैंसर ब्रेस्ट का ही होता है। अनुमान है कि हरियाणा में हर साल 3,000 से 3,500 नए ब्रेस्ट कैंसर के केस सामने आते हैं। चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अभी भी स्टेज 3 या 4 पर अस्पताल पहुंच रही हैं। यह कहना है पीजीआई के निदेशक डॉ एस के सिंघल का।
इसी समस्या को देखते हुए आज हरियाणा में कैंसर की रोकथाम और जल्दी पहचान के लिए पीजीआईएमएस रोहतक, एलपीएस बोसॉर्ड और डॉ. अनीता चैरिटेबल फाउंडेशन के बीच बुधवार को एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। दोनों संस्थाओं ने मिलकर कैंसर मुक्त हरियाणा समिति यानी सीएमएचएस के गठन का निर्णय लिया है। समझौते पर पीजीआईएमएस रोहतक के निदेशक प्रो. डॉ. एस.के. सिंघल और डॉ. अनीता चैरिटेबल फाउंडेशन के सदस्य ने हस्ताक्षर किए।
डायरेक्टर डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि इस समिति का मकसद डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, सरकारी विभागों, सामाजिक संस्थाओं और उद्योगों को एक साथ लाकर कैंसर के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करना है। इसके जरिए आम लोगों में जागरूकता फैलाने, बीमारी को रोकने, समय पर जांच और सही इलाज सुनिश्चित करने का काम किया जाएगा।
डीन डॉ अशोक चौहान ने बताया कि इस पहल की शुरुआत फाउंडेशन के मुफ्त मोबाइल मैमोग्राफी कार्यक्रम की सफलता से हुई है। पिछले दो साल में इस कार्यक्रम के तहत 9 हजार से अधिक महिलाओं की बिल्कुल मुफ्त डिजिटल मैमोग्राफी की गई। हर महिला को जांच की पूरी रिपोर्ट दी गई। जांच में 22 से ज्यादा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई और उनका इलाज समय रहते पीजीआईएमएस रोहतक में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव प्रसाद की टीम द्वारा किया गया। 300 से अधिक महिलाओं को अभी निगरानी में रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज शुरू किया जा सके। उन्होने बताया कि पीजीआईएमएस में सर्जरी, कीमो, रेडिशन थेरेपी की सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
जनसंपर्क विभाग के सीनियर प्रोफेसर इंचार्ज डॉ मंजूनाथ बी सी ने बताया कि अब सीएमएचएस के माध्यम से ब्रेस्ट, मुंह और गर्भाशय के कैंसर के लिए बड़े स्तर पर जांच शिविर लगाए जाएंगे। मोबाइल मुंह कैंसर जांच वैन भी शुरू की जाएगी। ग्रामीण इलाकों तक जांच पहुंचाने, आशा कार्यकर्ताओं और नर्सों को प्रशिक्षण देने, रिसर्च करने और कैंसर का रिकार्ड रखने पर भी काम होगा। समय पर पहचान से ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों को 20 से 40 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिन्हें मैमोग्राफी में कैंसर मिलेगा उनका आगे पीजीआई में इलाह किया जाएगा।
डॉ. मंजूनाथ ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर से घबराने की जरूरत नहीं, जागरूकता की जरूरत है। अगर महिलाएं हर महीने खुद जांच करें और 40 साल की उम्र के बाद हर 1-2 साल में मैमोग्राफी कराएं तो ज्यादातर केस शुरुआती स्टेज में पकड़े जा सकते हैं। उन्होंने इस मुहिम में सहयोग के लिए एलपीएस बोर्सड के एमडी राजेश जैन का विशेष आभार व्यक्त किया और कहा कि राजेश जैन की मोबाइल वैन इस कार्यक्रम को गांव-गांव तक पहुंचाने में बहुत बड़ा सहयोग करेगी। डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि इस साझेदारी से हरियाणा कैंसर रोकथाम में देश के लिए एक उदाहरण बनेगा। हमारा एक ही संकल्प है - जल्दी पहचानें, जल्दी इलाज करें, जीवन बचाएं।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें