-भक्ति गीत, कविता, ग़ज़ल एवं आध्यात्मिक विचारों से भाव-विभोर हुई संगत।
Indiknow, रोहतक । सतगुरु माता सुदीक्षाजी महाराज एवं पूज्य निरंकारी राजपिता रमितजी के पावन आशीर्वाद से रविवार को स्थानीय डेरा श्रीबाबा लक्ष्मण पुरीजी महाराज, गौ कर्ण तीर्थ, रोहतक में संत निरंकारी मंडल के भिवानी जोन का संत निरंकारी महिला समागम अत्यंत भक्तिमय एवं भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
समागम की अध्यक्षता उत्तराखंड के देहरादून–मसूरी जोन से पधारीं संत निरंकारी मिशन की कर्मयोगिनी बहन परम आदरणीय पिंकी निझोनजी ने की। उन्होंने सतगुरु माताजी का पावन संदेश प्रदान करते हुए कहा कि मानव जीवन का वास्तविक आधार निराकार परमात्मा है। मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ एवं श्रेष्ठ है और इसका परम उद्देश्य निराकार प्रभु का बोध प्राप्त कर भक्ति करना है। उन्होंने कहा कि परमात्मा की पहचान केवल सतगुरु ही करा सकते हैं।
अपने विचार व्यक्त करते हुए बहन पिंकीजी ने कहा कि नारी परिवार की सुदृढ़ नींव होती है। उन्होंने जगतमाता बुद्धवंतीजी, निरंकारी राजमाताजी एवं माता सविंदरजी महाराज के मिशन में दिए गए अमूल्य योगदान का उल्लेख करते हुए उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने महिला संतों को प्रेरित किया कि वे अपने बच्चों को मोबाइल के दुरुपयोग से दूर रखते हुए बाल्यावस्था से ही सेवा, सिमरन एवं सत्संग से जोड़ें, ताकि उनमें आध्यात्मिक एवं नैतिक संस्कारों का विकास हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सतगुरु के आदेश को ज्यों का त्यों स्वीकार कर अपने जीवन में धारण करना ही सच्ची श्रद्धा, समर्पण एवं गुरुभक्ति का परिचायक है।
बहन पिंकी निझोनजी ने कहा कि निरंकारी मिशन की वर्तमान सतगुरु माता सुदीक्षाजी महाराज ब्रह्मज्ञान के माध्यम से सम्पूर्ण मानवता को प्रेम, एकता एवं विश्व बंधुत्व का संदेश प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाता है, तभी उसके व्यक्तित्व का समग्र विकास होता है। सतगुरु द्वारा प्रदत्त ब्रह्मज्ञान के माध्यम से प्रेम, सेवा, सहनशीलता, विनम्रता, सहजता एवं मानवता जैसे दिव्य गुणों का विकास होता है, जो व्यक्ति को श्रेष्ठ नागरिक एवं आदर्श मानव बनने की प्रेरणा देते हैं। ईश्वर को जीवन का आधार बनाने से जीवन में सकारात्मक एवं चमत्कारिक परिवर्तन आते हैं।
समागम के दौरान महिला संतों ने कविता, भक्ति गीत, विचार, ग़ज़ल एवं अपने जीवन के प्रेरणादायी अनुभव प्रस्तुत कर संगत को आध्यात्मिक संदेश प्रदान किया। लघु कवि दरबार एवं अन्य भक्तिपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से नैतिक एवं मानवीय मूल्यों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया। सेवा, समर्पण, आत्म मन्थन, जाग्रति, प्रेम, एकता एवं ब्रह्मज्ञान जैसे विषयों पर आधारित प्रस्तुतियों ने उपस्थित संगत को गहन प्रेरणा प्रदान की। युवा प्रतिभाओं द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों एवं विविध कार्यक्रमों ने वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। मंच संचालन से लेकर प्रत्येक प्रस्तुति तक उत्कृष्ट समन्वय एवं एकत्व की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
सम्पूर्ण साध संगत की अटूट श्रद्धा और सक्रिय सहभागिता ने पूरे समागम को एक विशिष्ट रूहानी स्वरूप प्रदान किया। समागम उपरांत अनेक जिज्ञासाओं ने ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर अपने जीवन को प्रभु से जोड़ने का सौभाग्य प्राप्त किया।
प्रकाशन स्टॉल पर श्रद्धालुओं ने संत निरंकारी मिशन से संबंधित पुस्तकों एवं सतगुरु माताजी के आध्यात्मिक प्रवचनों पर आधारित साहित्य श्रद्धापूर्वक प्राप्त किया। इस अवसर पर डेरा श्री बाबा लक्ष्मण पुरीजी महाराज के महामंडलेश्वर बाबा कपिल पुरीजी महाराज, महामण्डलेश्वर बाबा राघव पुरीजी महाराज, मनीष ग्रोवर पूर्व मंत्री हरियाणा सरकार सहित विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के संत-महात्माओं, प्रतिनिधियों एवं अन्य गणमान्य नागरिकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
समागम के समापन अवसर पर बहन नीलम बलदेव राज नागपालजी ने समस्त साध-संगत, स्थानीय प्रबंधन, सेवादारों तथा सहयोगी संस्थाओं का हार्दिक आभार व्यक्त किया। संत निरंकारी महिला समागम आध्यात्मिक चेतना, नैतिक संस्कार एवं मानवीय मूल्यों के संवर्धन का एक प्रेरणादायी माध्यम सिद्ध हुआ, जिसने "सत्य, प्रेम, सेवा और मानवता" के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।








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