Indiknow, रोहतक। पीजीआईएमएस रोहतक के निदेशक एवं एनेस्थीसिया विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार सिंघल करीब 40 साल की सेवा के बाद शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो रहे है, लेकिन शुक्रवार को सार्वजनिक अवकाश होने के चलते गुरुवार को उनकी सेवानिवृत्ति के अवसर पर उनके कार्यालय में कर्मचारियों ने फूलमालाओं, पगड़ी पहना और स्मृति चिन्ह देकर भावभीनी विदाई दी।
डॉ सविता सिंघल ने इस अवसर पर उपस्थित कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि 12 जुलाई 1961 को जन्मे डॉ. सिंघल ने 1987 में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ से एमडी की डिग्री ली। 38 साल से ज्यादा समय तक एनेस्थीसिया विभाग में सेवाएं देने के बाद वे पीजीआईएमएस के निदेशक बने। यूएचएसआर की एकेडमिक काउंसिल, एग्जीक्यूटिव काउंसिल और कोर्ट के सदस्य, पीजी व यूजी बोर्ड ऑफ स्टडीज के चेयरमैन, डिसिप्लिनरी कमेटी के चेयरमैन और निश्चेतन संकाय के डीन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। कोविड के दौरान नोडल अधिकारी, स्टेट ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन सोटो की स्टीयरिंग कमेटी के चेयरमैन और स्टेट ट्रामा सेंटर के नोडल अधिकारी के रूप में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
डीन डॉ. अशोक चौहान ने कहा कि डॉ. सिंघल के नेतृत्व में पीजीआईएमएस ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। सुपरिटेंडेंट अशोक शर्मा ने कहा कि डॉ सिंघल केवल कुशल प्रशासक ही नहीं बल्कि सभी के मार्गदर्शक भी थे। निदेशक के रूप में उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि संस्थागत विस्तार रही। सुप्रिटेंडेंट जयभगवान ने कहा कि डॉ सिंघल के प्रयासों से न्यूक्लियर मेडिसिन, और जेरियाट्रिक मेडिसिन जैसे नए विभाग शुरू हुए। मेडिटेशन,योग ओपीडी, मेडिटेशन और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं जोड़ी गईं। कई विभागों में DNB शुरू हुआ। रेडियोथेरेपी के लिए 42 करोड़ का CSR, डायलिसिस मशीन, कई विभागों का विस्तार और ब्लड बैंक वैन जैसी सुविधाएं भी उनके कार्यकाल में मिलीं। डॉ. सिंघल ने ड्रग फ्री कैंपस, स्वच्छता अभियान, भ्रष्टाचार पर लगाम और ई-उपचार के जरिए ऑनलाइन परामर्श की शुरुआत की। उनके 156 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए हैं। सेवानिवृत्ति पर डॉ. सिंघल ने कहा कि पीजीआईएमएस मेरा परिवार है। यहां मरीजों की सेवा और टीम के साथ काम करना सबसे बड़ी उपलब्धि रही। उनका विजन है कि वृद्ध, बेडरिडन और कैंसर मरीजों के लिए स्किल बेस्ड कोर्स शुरू हों, रोबोटिक सेंटर और सिमुलेशन लैब बने और CSR से और अत्याधुनिक उपकरण आएं।

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